सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें४६ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय. फलित खण्ड
विचार देह, धातु यन्त्र रसायन में निपुण और प्रसिद्ध ( छ० च० ) । जल यन्त्र धातु
पारा आदि रसायन निर्माण में निपुण, इन्हीं को प्रसिद्ध कार्य मानने वाला (सारा०) ।
सूय बुध गुरुः शुक्र शनि-मित्रों में प्रीति, शास्त्रों का ज्ञाता, धर्मवान्, गुरु को
-संमान, और दयालु [मान०] [छ० 'चं०] । ज्ञानी,देव गुरु का सम्मान कर्ता, धमं शील
शास्त्री [ जा० पारि० ) । बहुत शास्त्र जानने वाला, मित्र और गुरुजनों का प्रिय,
धर्मात्मा और दयालु [ सारा० ] ।
चन्द्र मंगल बुध गुरु शुक्र-साधुता तथा कल्याण से हीन, धन तथा विद्या से सुखी,
बहु पुत्र [ मान० ] । साधु, पापहीन, धन विद्या ओर सुख से युक्त, बहु मित्र,
सुखी, धन धान्य में प्रबल, विद्वान् [ जा० पारि० ] [ छ० चं० ] ।
चन्द्र मंगल बुध शुक्र शनि-दुर्भग, मलिन, मूर्ख, दास, नपुंसक, दरिद्री [मान०] ।
[छ०चं०] । बहुत मित्र और बहुत शत्रु वाला, परोपकारी, टेढ़ा स्वभाव [सारावली] ।
चन्द्र मंगल वुध गुरु शनि-यन्त्र क्रिया में, धातु विषय में तथा बळ में प्रसिद्ध
[जा० पारि०] । तिमिर रोगी, दरिद्र, परान्न भोजी, दीन, अपने बन्धुओं को लज्जित
करने वाला [सारा०] । दै
चन्द्र मंगल गुरु शुक्र शनि-भिक्षा मांगने वाला ब्राह्मण, अति मलिन, तिमिर
रोगी, [मान०] । पराया अन्न पकाने वाला, सदा दरिद्री, मलिन, [ल० चं] । - दूत,
दरिद्र, मलिन वेश, मूर्ख, चोर [जा० पारि] ।
चन्द्र बुध गुरु शुक्र शनि-राजा के तुल्य या राजा का मंत्री, लोक पूज्य, गुणवान्
[मान०] । सवंत्र पूज्य, विकल नेत्र, राजा के तुल्य या मन्त्री [जा० पारि०] । भड
मंगल बुध गुरु शुक्र शनि-आलसी, तमोगुणी, पागल, राजां का प्रिय, निद्रालु
'[मान०] । शोकहीन, तामस, द्रव्यहीन, उन्माद युक्त, राजा को प्यारा, निद्रालु
[छ. चं.] । पूज्य, रोगी, कला में निपुण, बघ और बन्धन, से युक्त [जा० पारि०] ।
घड़ग्रह योग
सूयं चन्द्र मंगल बुध गुरु शुक्र-विद्या धन धमं से युक्त, भोगी, भाग्यवान्, सकेत्र
विख्यात [मान०] । विद्या धमं और धन से युक्त, बहुत बोलने वाळा, भाग्यवान्
लाभयुक्त (७० चन्द्रि0) । तीर्थ करने वाला, बन और पहाड़ में रहने वाळा, स्त्री पुत्र
और धन से युक्त [जा० पारि०] । . -
सूय चन्द्र मंगळ बुध गुरु शनि-दूसरे का कायं करने वाला, दान देने वाला, शुद्ध
अन्तःकरण, चंचल आकृति, सवत्र विजय कर आनन्द करने वाला [मान०] । पराया
कर्म करने वाला, दाता, शुद्ध आत्मा, चंचल आकृति, मनुष्यहीन स्थान में रहने वाळा
[छ० चन्द्रि ०] । चोर, परस्त्रीरत, बांधवों से हृषित, पुत्रहीन, मुखं विदेशी [जा. पारि.]।
सूर्य चन्द्र मंगळ बुध गुरु शुक्र शनि-संशय करने वाळा, बड़ा भाग्यशाली, बड़ामानी, विख्यात, युद्ध में शत्रु को मारने वाला, झगड़े में मन (मान०) (छ० चन्द्रि०) । नीच,
दूसरे के काम में लीन, क्षय ओर पीनस रोग से दुःखी (जा० पारि०) ।