सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंअनेक ग्रहों के एक राशि में होने का फल : ४७
सूर्य चन्द्र मंगल गुरु शुक्र शनि-अपनी स्त्री से प्रेम, संसार में उत्साह, वहमी,
क्रोधी, लोभी, सुन्दर ( मान० ) । द्रव्य प्रिय, लड़ाई में उत्साह युक्त, चुगल, क्रोधी,
लोभी, सोभाग्यवान् ( रू० चन्द्रि० ) । मंत्री, स्त्री, धन, पुत्र, हष से हीन और शांत ।
सूर्य चन्द्र बुध गुरु शुक्र शनि-स्त्री से रहित, द्रव्य हीन, राजा का मंत्री क्षमायुक्त,
सुन्दर [ मान० ] ( ल० चन्द्रि० ) । शिर में पीड़ा, उन्माद प्रकृति वाला, देव भूमि में
वासी; विदेश में प्राप्त [ जा० पारि० ] 1
सूयं मंगल बुध गुरु शुक्र शनि-द्रव्यहीन, स्त्री तथा पुत्रों से हीन, तीर्थो को जाने
वाला, जंगल में रहने वाला (मान०)[ल०चन्द्रि ०] । संचार शीळ,विद्वान् [जा०पारि०] ।
चन्द्र मंगल बुध गुरु शुक्र शनि-धनवान्, राजा का मन्त्री, बड़ा पवित्र, आलसी,
बहुत स्त्री, राजा का प्रिय, प्रतापी [मान०] । धनी, पूत्रवान्, पवित्र मैत्री, बहुत स्त्री
वाला, राजा का प्रिय, प्रतापी [ल० चन्द्रि.] तीर्थ करने वाळा, ब्रती [जा० पारि०] ।
५ या ६ ग्रह से युक्त या दृष्ट कोई भाव-यदि ५ या ६ ग्रह एक घर में हों या
इन ग्रह्मो की दृष्टि हो तो वह. प्रायः दरिद्री या मूर्ख होता है (मान०) ।
सप्त ग्रह योग
सूर्य चन्द्र मंगल बुध गुरु शुक्र शनि-सातों ग्रह एक साथ हों तो सूर्य के समान
तेजयुक्त, राजाओं से आदर पाने वाला, महादेव का भक्त, दाता तथा बड़ा घनी होता
है [ मान० ] ।