भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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योग विचार : ४९

इनका फल. एक दूसरे की अपेक्षा कम होता है । जैसे केन्द्र से पणफर का मालाश्रय

कम फलदायक है वैसे ही पणफर से अनियत मालछाश्रय का और कम फल होगा ।.

भावेश योग

जब दो या अधिक भावेशों का योग हो तो भावेश योग होता है केन्द्र त्रिकोण के

आवेश का योग शुभ फल देता है परन्तु ६-५-१२ स्थान में भावेश का योग हो तो

वह निर्बेल हो जाता है । भावेश दृष्टि योग

जब दो या अधिक भावेश एक दूसरे पर पूर्ण दृष्टि करते हों तो आवेश दृष्टि योग

होता है । ६-८-१२ के भावेश जिस भावेश पर दृष्टि करते हों वह भावेश निर्बल हो

.जाता है ।

त्रिकोण योग--जब दो भावेश एक दूसरे के त्रिकोण में हों तव त्रिकोण योग

होता है । यह योग लक्ष्मी राजवैभव और यशदायक होता है, केन्द्रेश और श्रिकोणेश का

त्रिकोण योग श्रेष्ठ होता है ।

केन्द्र योग--जब दो भावेश परस्पर केन्द्र में हो तब केन्द्र योग होता है यह्‌

महत्व दर्शाता है ।

लाभ योग--जब दो भावेश एक दूसरे से ३-११ स्थान में हों तब लाभ योग

होता है यह बहुत सम्पत्ति देता है ।

द्विद्वीदश योग--जब दो भावेश एक दूसरे से २-१२ स्थान में हों तब हिद्दादश

योग होता है यह दरिद्रता लाता है ।

-षड्ष्टक योग--भव दो भावेश एक दूसरे से ६-८ स्थान में हों तब षड्ष्टक योग

होता है यह दुःख और कष्ट देता है ।

अन्योन्याश्रय योग फल

परस्पर एक दूसरे के स्थान में भावेश होने का फल

लग्नेश द्वितोयेश का-बहुत लाभ ।

द्वितीयेश तृतीयेश का-राजभूत्य ।

ततीयेश चतुर्थेश का-सेनापति ।

चतुर्थेश पंचमेश का-मंत्री ।

पंचमेश षष्ठेश का-भयानक कमं ।

षष्ठेश सप्तमेश का-राजयोग ।

सप्तमेश अष्टमेश का-स्त्री की-मृत्यु ।

अष्टमेश नवमेश का-भाग्य का व्यय ।

नवमेश दशमेश का-राजयोग, सब प्रकार का सुख ।

दशमेश लाभेश का-भूमि द्रव्य ।

लाभेश व्ययेश का-ऋण तथा व्यय ।

छ ४