सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंयोय विचार : ५१
चतुर्थेश के साथ लरनेश, भाग्येश राज्येश का परिवर्तन- वाहन आदि का अभ्युदय और अभिवृद्धि हो। राज्येश या भाग्येश वाहन स्थान या उसके स्वामी को दे दें तो भी वाहन योग होता है। ( ज्यो० शा० ) द्वितीयेश नवमेश का-३२ वर्ष के बाद भाग्योदय वाहन यश लाभ (बु० पा० ) १ नवमेश दशमेश का-उसका पिता धनी और यशस्वी हो ( वृ० पा० ) । दशमेश लाभेश का-सुखी हो और लाभ हो ( बु० पा० ) ।
उच्च नीच स्वगृही आदिं ग्रह का फल (१) उच्च ग्रह का फल
कोई ग्रह उच्च फा हो तो रत्न आदि प्राप्त हो, राजा से प्रशंसा, बहुमूल्य कोष कर
संग्रह, उदार गुण, उच्च हृदय, आचरण, कीति, वीरता, स्वतन्त्रता साहस और चतुराई,
राजा के समान विक्रम हो ( फल दी० ) ।
१ ग्रह उच्च का बली हो तो-धन्य और धनी हो ।
२ ग्रह उच्च के बली हों तो-छोटा राजा ।
३ ग्रह उच्च के बली हों तो-राजा ।
४ ग्रह उच्च के बली केन्द्र में हों-महाराजा ।
५ ग्रह उच्च के बली केन्द्र में हों-चक्वर्ती हो ( जा० पारि० ) ।
एक ग्रह उच्च का हो उसे उसका मित्र ग्रह देखे-वड़ा श्रीमन्त हो ।
शेष उच्च का फल स्वक्षेत्र के अनुसार होता है ।
सूर्य चन्द्र स्व उच्च में हो तो राजा सरीखा ऐश्वर्य देता है ।
उच्च का ग्रह त्रिकोण में हो तो घनवान् और प्रसिद्ध होता है ( प्रा० यो० ) ।
एक भी ग्रेह मित्र ग्रह से युक्त या दुष्ट हो तो वह राजपूज्य धनादि युक्त होता है
( जा० पारि० ) 1
३ ग्रह उच्च के हों तो-राजा हो ( जा० पारि० ) ।
पाप ग्रह उच्च का हो तो मनुष्य राजा नहीं होता परन्तु वह धनवान् और कलह
प्रिय होता है
६-८-१२ घर में उच्च का फल अच्छा नहीं होता ।
उच्च नीच का प्रभाव
बुरे ग्रह जिन पर शुभ दृष्टि हो या अच्छे घर में हों या उच्च में हों तो अशुभ फल
को बदल देते हैं और लाभजनक फल भी दे सकते हैं। जैसे उच्च का पाप ग्रह द्वितीयेश _
होकर द्वितीय भाव में हो उस पर कोई शुभ दृष्टि महीं है तो भावोक्त पूर्ण शूभ फल
नहीं देगा। .
यदि ग्रह नीच का होकर पाप दृष्ट हो तो उसे बहुत हानि उठानी पड़ेगी । ग्रह का
चल या निर्बेछता गणित से निकाल लेनी चाहिए । बुरे ग्रह हानि कष्ट ओर बरबादी
क्रते हैं परन्तु उनके बीच शुभ ग्रह भी हो चाहे दृष्टि द्वारा उच्चता या अच्छे वर्ग में