भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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४४ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

शुभ ग्रह फल

साधारण प्रकार में शुभ ग्रह इन-स्थानों में. ये फल देते हैं--

(१) लग्न में-अच्छी आयु (७) सप्तम में--स्त्री सुख ।.

(२) घन में--धन (८) अष्टम में--चिरायु ।

(३) सहज में--भ्रातू सुख (९) नवम में--पुण्य कर्म ।

(४) चतुर्थ में--ग्रह सुख (१०) दशम में--अपने कुळ का पालक )

(५) पंचम में-अच्छी विद्या अच्छे पुत्र (११) लाभ में--लछाभ ।

(६) षष्ठ में--शत्रु भय (१२) व्यय में-हानि ।

पाप ग्रह फल

साधारण प्रकार से स्थान के अनुसार पाप ग्रह फल--

(१) छग्न में--रोग (७) सप्तम में--स्त्री पीड़ा, स्त्री नाश ॥

(२) धन में निर्धनत्व (८) अष्टम में-- रोग

(३) सहज में--पराक्रम, भाई को कष्ट (९) पाप की--कमाई ।

(४) चतुर्थ में-सुखनाश (१०) दशम में-शूरता ।

(५) पंचम में-पुत्र नाश, बुद्धिधीन (११) लाभ में--लाभ

(६) षष्ठ में--शत्रु नाश (१२) व्यय में-हानि ।

जन्म राशि या लग्न से पाप ग्र ह--४-१०-१२ घर में-पिता को कष्ट ।

जन्म राशि या लग्न से पाप ग्रह- २, ४, ७, १२ घर में-माता को कष्ट ।

जन्म राशि या लग्न से पाप ग्रह-३, ६, ११ घर में-अच्छा फल देते हैं ।

जन्म राशि या लग्न से पाप ग्रह-1,६,८,१९घर में-क्षीण चंद्र अशुभ होता है ६

जन्म राशि या लग्न से पाप ग्रह--१,८,१२ घर में-पाप ग्रह अरिष्ट करते हूँ ।

जो भाव पाप ग्रह युक्त या दृष्ट हो-उस भाव की हानि होती है।

पाप ग्रह नीच का हो तो सम्पूर्ण फल का नाश करता है ।

ग्रह्‌ का बलाबल के अनुसार मूल विचार

(१) ग्रह उच्च में-पूरा फल देता है।

(२) ग्रह मूल त्रिकोण में-पोन फल देता है ।

(३) ग्रह स्वक्षेत्र में-आधा फल देता हे ।

(४) ग्रह अधिमित्र क्षेत्र मे-डे फल देता है ।

(५) ग्रह मित्र क्षेत्र मे डे फल देता है ।

(६) ग्रह सम क्षेत्र में-ह फल देता है ।

(७) ग्रह शत्रु क्षेत्र में-३ हः फल देता है ।

(८) ग्रह अधि शत्रु क्षेत्र में-ब'इ फल देता है ।

(९) ग्रह निन्दय में-उल्टा बुरा फल देता है। अच्छा कोई फल नहीं देता ।

( प्रा चो० ) ।