सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 64, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ें५६ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
चन्द्र मित्रगृही-त्रडा भाग्यवान्, चतुर, धनवान्, ( मान० ) ( छ० चं० ) । बहु-
मान्य, सुखी, धनी ( जा० पारि० ) ।
चन्द्र शत्रुगुही-हृदय रोग ( मान० ) ( ७० चं० )। माता को कष्टदायक, हृद्य
रोगी ( जा० पारि० ) ।
(३) मंगल का उच्चादि स्थिति का फल
मंगल उच्च का-बड़ा उम्र प्रहार करने वाला, क्रूर, तीक्ष्ण, शास्त्रघारण, बातचीत
के कारण लोक में प्रसिद्ध, राजकुल को प्रिय, बड़ा शूर ( मानं० )। उग्र प्रताप,
राजाओं को वशकरे, शास्त्रों के धारने में निपुण, धनधान्यों से पूणं, अधिक रक्त. युक्त,
रणभूमि में सबसे आगे जाने वाला, अच्छे पुत्र, तेजस्वी ( ल० च० ) ।
मंगल नीच का-अति लक्ष्मीवान्, स्थिर वैभव, बुद्धिमान्, गुणज्ञ, रात्रि में
विचरने वाला, बड़ा चोर, दुष्ट (मान०) । नीच, कुत्सित, व्यसन मे आतुर (ल०च०) ।
मंगल त्रिकोण का-शूरवीर; दया से हीन, बड़ा खल ( मान० ) । क्रोधी,
निर्देयी ( जा० पारि० ) ।
मंगल स्वगृही-वडा चपल, धनवान् ( मान० ) बड़ा चञ्चल और घनवान्
( छ० चं० ) कृषि और बल में विख्प़ात ( जा० पारि०) ।
मंगल मित्रगृही-शस्त्र से जीविका करने वाला, ( मान०)। शस्त्रविद्या से
आजीविका ( ल० चन्द्रि० ) मित्र प्रिय हो ( जा० पारि० ) ।
मंगल शत्र गृही-स्त्री के कारण जड़ और निर्धन ( मान० ) । स्त्री मूर्ख हो और
निधन हो ( ल० चन्द्रि० ) विकल, कृतघ्न, मलिन ( जा० पारि० ) 1
(४) बुध का उच्चादि स्थिति का फल |
बुध उच्च का-उदार, पूर्ण विद्वान्, मंत्री से सदा रक्षित, पूर्ण क्रिया भम
आलस्य युक्त, सूर्योपासक, अति बुद्धिमान्, धनाढ्य, पापों से रहित, (मान०) । पढाने
चाला, शुभ बुद्धि, राजा, धनी, ऐश्वयंवान्. गुणवान्, उदार, अच्छी कीति, सुपुत्र, निरोग,
सुन्दर भित्र वाला, सबका उपकारी, बुद्धिमान, दृढ़ प्रतिज्ञ, नेता ( छ० चन्द्रि० ) ।
बुध नीच का-शुभमति, शुभशील युक्त, पति के वचन को अनुमोदन करने वाली
उत्तम स्त्री से युक्त, संतान रहित ( मान० ) क्षुद्र, भाइयों कां वरी ( ० चन्द्रि० )
( जा० पारि० ) ।
बुध फल त्रिकोण का-बड़ा विद्वान्, क्रीडा करने वाला, विजयी ( मान० ) । जानने
चाला, आनन्दी और विजयी मनुष्य ( छ० चन्द्रि० ) धनी, तेजस्वी ( जा० पारि० ) ।
` बुध स्वक्षेत्री-अनेक कलाओं का जानने वाला, धनवान् होने पर भी पीड़ित
( मान० ) चञ्चल और धनवान् ( ल० चन्द्रि० ) । व
बुध मित्रक्षेत्री-रूप तथा धन से युक्त ( मान० ) ( छ० चन्द्रि ) चतुर, गुणवान्
हास्य में अग्रणी ( जा० पारि० )। 0002
बुध शत्रू, क्षेत्री-मूखं, वाणी द्वारा धनवान, दुःख से पीडित ( मान० ) मूर्ख, गूंगा
और दुःख से पीडित ( ल० चन्द्रि ) सुखी, पाप बुद्धि ( जा? पारि० ) । र