सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 72, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ें६४ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
षष्ठ्यंश नाम ओर क्रम षप्ठ्यंश का नाम और क्रम
३१ ३० मृत्यंश + ४५ १६ सोम्यांश
३२ २९ कालांश # ४६ १५ मृद्दंश (कोमलांश)
३३ २८ दावाग्नांश + ४७ १४ सुशीतलांश या शीतलांश
३४ २७ घोरांश * ४८ १३ दष्ट्राकराल +
३५ २६ अभयांश (यमांश) या मयांश ४९ १२ इन्दु मुभांश
: या यम + ५० ११ प्रवीणांश
३६ २५ कंटकांश ५१ १० कालाग्न्यंश
३७ २४ सुघांश ५२ ९ दंडायुध
३८ २३ अमृतांश ५३ ८ निमेलांश या निर्माश
३९ २२ परिपूर्ण चन्द्रांश ५४ ७ सोम्यांश या शुर्माश
४० २१ विषप्रदरघांश ५५ ६ कूरांश या अशुभांश क
४१ २० कल्यंश (किलनाशांश) या ५६ ५ अतिशीतलांश
कुलनाशांश + ५७ ४ सुघाँश
४२ १९ वंश क्षयांश * ४५८ ३ पयोधीशांश
४३ १८ उत्पातकांश + ५९ २ भ्रमणांश या भ्रमणेन्दु *
४४ १७ कालख्पांश रू ६० १ इन्दुरेखांश
( + चिल्ल वाले अशुभ हैं)
किसी ग्रहादि के षष्ठ्यंश के नाम जानना--ग्रह की राशि को छोड़कर अंश दूने
करना । कला ३० से कम हो तो १ और जोड़ना यदि कला ३० से अधिक हो तो २
जोड़ना-जो संख्या प्राप्त हो यदि वह राशिं विषम है तो सीधे दिये हुए क्रम के आगे जो
नाम मिले वह लेना । यदि राशि सम हो तो उल्टे क्रम से गिनने में उस षष्ठ्यंश का नाम प्रकट हो जायेगा-जंसे सूयं मीनं का ५९-४०-४५” है ५०१८ २--१०+२=१२ यहाँ काल ३० से अधिक है तो २ जोड़ा=मीन सम राशि होने से उलटा १२ जहाँ लिखा है इन्दु मुखांश नाम आया । चन्द्र कुम्भ २-७-५५” है।. २२९२+ १=५ कला ३० से कम होने से १ जोड़ा अम्भ विषम है । क्रम से पांचवाँ गिना तो रक्षोगणांश आया ।
षष्ठ्य श के नामों में मतांतर
४० क्रम तक तो अन्तर नहीं है आगे एक का अन्तर पड़ने से क्रम में एक न्यूनाधिक ५७ क्रम तक होता है ५८ से ६० तक क्रम में कोई अन्तर नहीं है । ४१ के बाद ४२ नामांश अधिक ले लेने से क्रम में अन्तर पड़ गया है।
क्रम नाम षप्ठ्यश मतांतर
३९ परिपूर्ण चन्द्रांश ३९ परिपूर्ण चन्द्रांश ¥o विषप्रदग्धांश ४० विषप्रदग्धांश