भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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कर्म

४१

४२

४३

५९

, ६०

नाम षष्ठय'श

कल्पाँश

वंशक्षयांश

उत्पातकांश

कालख्पांश

सौम्यांश

मृद्दश

सुशोतलांश

दष्ट्राकरालांश

इन्दुमुखांश

प्रवीणांश

कालाग्न्यंश

दंडायुधांश'

निमेलांश

सौम्यांश

ऋरांश

अतिशीतांश

सुधांश

पयोधीशांश

अमणांश

इन्दुरेखांश ६०

षड्वर्ग विचार : ६५

मतान्तंर

. कल्यंश

नाशांश

वंशक्षयांश

उत्पातकांश

कालरूपाँश

सौम्यांश

मृद्ांशः

सुशीतलांश

दंष्ट्राकरालांश.

इन्दु मुखांश

प्रवीणांश

काळार्न्यंश

दंडायुधांश

निर्मलांश

शुभांश

अशुभांश

अतिशीतलांश

सुधापयोध्यंश

भ्रमणांश

इन्दुरेखांश॑

जैसे यहाँ बताया है । ५७ क्रम तक यह अन्तर है ५७ सुधांश ओर ५८ पयोधी-

शांश एकं मिलाकर ५८ में सुधापयोध्यंश कर दिया है आगे ५९ और ६० क्रम: में कोई अन्तर नहीं है ।

शुभ षष्ठ्यंश--मुद्वंश, देवलोकांश, किन्नरांश आदि हैं ।

कूर षष्ठ्यंश--घोर राक्षस, अग्नि प्रेतपुरी आदि हैं ।

नाम के आगे + ऐसा चिह्न देकर बता दिया है वे अशुभ षष्ट्यंश हैं ।'

क्रूर षष्ट्यंश में ग्रह बुरा फल देते हैं ।

शुभ षष्ठ्यंश में ग्रह अच्छा फल देते हैं ।

वर्ग विचार

ग्रहों के वर्ग विचार में कहीं षड़वर्ग का कहीं सप्तवगे का कहीं १० वर्ग का

विचार होता है जिनका वर्णन आगे दिया है।

१० वर्ग में जो ग्रह स्ववर्ग आदि में हों उसकी संख्या के अनुसार उसकी

पारिजात आदि संज्ञाएँ होती हैं जो शुभ हैं जिनका वर्णन आगे दिया है ।

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