सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें` ६६ ! सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
अंश--फल वर्णन करने में कहीं-कहीं दिया रहता है कि ग्रह अपने अश में हो
उसका अथं है कि अपने नवांश में हो । अंश से सदा नवांश समझना ।
वर्गोत्तम-जो राशि हो वही राशि नवांश में हो तो वर्गोत्तम कहछायगा जैसे
शेष राशि हो और नवांश में भी मेष का नवांश हो तो वह वर्गोत्तम होता हैँ
` चरराशि के आदि के नवांश वर्गोत्तम हैं--वर्गोत्तम में जन्म हो तो कुछ में मुख्य
होता है।
स्थिर के मध्य के नवांश वर्गोत्तम हैं।
द्विस्वभाव के अन्त के नवांश वर्गोत्तम हैं ।
मतान्तर - अपने-अपने घरों में जो अपने नवांश हों बह वर्गोत्तम हैं ।
षडवगे शुद्धि-षड़ वर्ग में जो राशि हो उसी राशि का .अंशक ( वर्ग ) में जो
अह हो वह षड़ वर्ग शुद्धि कहलाता है जैसे मेष राशि में मेष का नवांश वृष में वृष
का नवांश आदि । इसी प्रकार प्रत्येक वर्ग में विचारना ।
षड़ वग शुद्धि-होरा केवल सूर्य चन्द्र का होता है मंगल आदि दूसरे ग्रह का
नहीं होता । त्रिशांश सूर्य चन्द्र का नहीं होता केवल मंगल आदि ५ ग्रहों का होता है
इससे षड़ वर्ग शुद्धि नहीं हो सकती पंचवगे शुद्धि ही होती है ।
षड़वगे शुद्धि ग्रह का. फल
कोई ग्रह मित्रगृही, स्वगृही, उच्च, मूल त्रिकोण में हो वह षड़वर्ग शुद्ध ग्रह
सब फल देता है ।
कुण्डली में एक भी षड़वर्ग शुद्ध ग्रह हो--तो वह सब सम्पत्तियों से युक्त हो
ओर धन का स्वामी हो । वाहन युक्त हो । १
यदि एक से अधिक २ ग्रह आदि ऐसे हों तो--पुस्वी-में सिद्ध तथा किन्नरों के
समान. होता है । र
खये में शुभाशुभ फल विचार
{१) मित्र वर्ग, सौम्य वर्ग या उच्चगत ग्रह हो--तो शुभ होता है । गा च डत पाप वर्ग में हो तो--अशूभ होता है । ३) इनमें पाप वर्ग ओर शुभ वर्ग का न्यूनाधिक देखके--जिसकी १ उसके अनुसार फल कहे । ( याशी:
शुभाधिक्य वग में क्रूर भी हो तो- शुभ होता है 1 शुभाधिक्य वर्ग में शुभ ग्रह भी हो तो--अधिक शुभ होता है । पाप वर्गाधिक्य में शुभ प्रह भी-क्र र होता है । हे पाप वर्गाधिक्य में कूर ग्रह भो--अधिक क्रूर फल होता है । बड़वगे में शुभ गुण अधिक हो--घनी और अधिक आयु वाला हो ।