सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 80, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ें७२ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
७-ब्रह्मलोकं मुनि ईश्वरोपासक यज्ञ कर इन्द्र पद पावे
द-ऐरावत संवंदा सन्तुष्ट ईश्वर भक्त स्वयं धर्मावतार होता है
( दुःखहीन ) केन्द्रेश त्रिकोणेश दोनों के परस्पर सम्बन्ध से राजयोग होता है । इनका वर्ग में
फल-केन्द्रेश त्रिकोणेश दोनों यदि- बू-पारिजात में-प्रजा रक्षक राजा श-पारावत-मनु आदि सरीखे
२-वर्गत्तिम-भ्रे ष्ठ वाहन युक्त श्रेष्ठ राजा ६-देवलोक-विष्णु का अवतार
चे-योपुर-राजाओों में मान्य राजा ७-क्रह्वालोक-ज्नह्या आदि सदृश देव
विश्व पालक
४-सिहासन-गुधिष्ठिर आदि सरीखे चक्रवर्ती राजा ८-ऐरावत-पुवे स्वयंभू मनु हुए ।
वर्ग में होरा का फल
१--सूर्र्य मे होरा का फल (१) सूर्ये होरा में जन्म-धामिक, सत्यवक्ता, गुरु और देव पूज क, स्वउपाजित धन . का भोगी । तेजस्वी. हो परन्तु कायं में क्रूर हो। सिद्धि एवं राज्य प्राप्त हो सुखी, धनी पुत्र पौत्र कल्याण युक्त पूर्ण आयु । (२) सूर्य होरा क्रूर ग्रह-धन धान्य वैभव युक्त, राजप्रियः आचार सत्व शील, निरोग, बली जितेन्द्रिय, स्त्री संभोग कठिनता से प्राप्त हो। (३) सूर्यं होरा में विषम राशि में पाप ग्रह-क्ीतिमान्, बड़ा उद्यमी, बलवान्, घनवान्, तेजस्वी ।
सूयं होरा में सम राशि में पाप ग्रह-पूर्वोक्तफल मध्यम । सूयं होरा में विषम राशि में शुभ ग्रह-मृदु शरीर कांति सौख्य, सौभाग्य, बुद्धि मधुर वाणी के फल उल्टे हों । (४) सूर्य स्वहोरा मे-विद्वान् सेतर पुषषार्थी जितेन्द्रिय शूरवीर उद्यमी । सूर्य होरा में चन्द्र-सदा नीच बुद्धि । सूर्य होरा में मंगल-बड़ा धीर, वाहन वाहक, सज्जनप्रिय, बड़ा शूरवीर, विख्यात, धन सम्पन्न, उत्तम मित्र युक्त, अनेक सम्पत्ति युक्त । सूर्य होरा में बुध-दरिद्री और चुगलखोर । सूर्यं होरा में गुरु -रोग से अनवसर मृत्यु । सूर्य होरा में शुक्र-अगम्या स्त्री से रमण । सूयं होरा में शनि-वुषलीपति होता है। जि होरा का फल १) चन्द्र के होरा में जन्म हो तो मुदु होता है। सब कार्य में शुभ है । र i द्विपद राशि में कुंभ लग्त को छोड़ कर अन्य लग्न स बा का होरा