सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 82, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ें७४ : सचित्र. ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
६--वराह द्रेष्काण--कर्क का पहिला ।
७--पाश (फांसी) द्रेष्काण--वृश्चिक का दूसरा ।
अग्नि द्रेष्काण--पाप ग्रह का द्रेष्काण ।
जल द्रेष्काण--शुभ ग्रह द्रेष्काण ।
मिश्र द्रेष्काण--पाप और शुभ दोनों से युक्त या दृष्ट ।
२२ वां द्रेष्काण--अष्टम स्थान में जो तत्काल द्रेष्काण हैं वही लग्न से २२ वां द्रेष्काण होता है।
द्रष्काण फल
राशिपर द्रेष्काण संज्ञा जन्म फल
५, १, ११, ८, १० --खल बुद्धि, घूमने वाला, ५, ७, ८, १२ ( ११ द्रेष्काण ) पापकर्मा, अपवादी । ४-५
४-१२ १ | ६ द्रेष्काण) --दाता भोगी, दयालु, कृषि तथा १२-६ २? जलचर वस्तु से घनवन् शील रहित ॥ २-३ ३]
१, २, ९, १०, ११ ( ११ द्रेष्काण ) --सुख, धन, पुत्र युक्त, दयालु,
७, ९, ६ रमणीक शरीर । ६, ९, ११
१, ४, १९ ३ ८ द्रेष्काण ) --कुशील, पर स्त्री में रमण, कूर २, ९ १ मिश्र दृष्टि, चंचल आत्मा। ३, ५, ७ २
इष्काण विचार--यात्रा में कहीं जाते समय या दूसरी जगह से कहीं जाना हो तब विचारना ।
१ द्रेष्काण शुभ का हो तो पुण्य युक्त या रत्न युक्त है शुभ ग्रह की दृष्टि हो तो- जय हो ।
२ जिस द्रेष्काण में आयुध युक्त है उस पर पाप ग्रह की दृष्टि हो तो-हार या नाश हो ।
३ भुजंग (सपे), पाश, इन द्रेष्काणों में यात्रा करने से कैद होता है । ४ द्रेष्काण के समान चोर कहना यह स्वरूप बताने का प्रयोजन है ये स्वरूप आदि आगे बताये गये हैँ ।
५ (१), आयुध, (२), पाश, (३), निगड, (४), गृद्ध, (४), पक्षी, (६), वाराह, (७), सपे, (०), चतुष्पद, इन द्रेष्काणो में जन्म हो तो घन. रहित, कर स्वभाव, निद्य ओर दरिद्र हो
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