भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

पृष्ठ 88, कुल 454 में से

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पृष्ठ 88

२० : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

चन्द्र शत्रु द्रेष्काण में हो-गुण रूप से हीन ।

चन्द्र सपं द्रेष्काण में हो-उग्न स्वभाव ।

चन्द्र उद्दत आयुध द्रे में हो-प्राण घात के लिए हथियार उठाये रहे ।

चन्द्र चौपाया द्रेष्काण में-गुरुजन की स्त्री गमन करना ।

चन्द्र अंडज ( पक्षी ) द्वे० में हो-फिरने वाला ।

जहाँ जहाँ अपने द्रेष्काण और सपं द्रेष्काण में भी हो तो दोनों फल हों ।

द्रेष्काण के अनुसार चन्द्र का फल

(१) मेष के पहिले द्रे० में चन्द्र हो-छोगों का घातक हो । यदि मित्र द्रेष्काण

हो तो सुन्दर तेजस्वी ।

दूसरे द्रे० में चन्द्र हो-सुन्दर, तेजस्वी, गुरुजन की पत्नी से रमण करने

वाला ।

तीसरे ब्रे० में चन्द्र हो-पहिले द्रेष्काण के अनुसार फल ।

(२) वृष के पहिले द्रे० में चन्द्र हो-गुरु स्त्रियों से गमन करता, शुक्र दृष्टि हो:

तो शुभ फल।

दुसरे द्वे० में चन्द्र हो-गुरु स्त्रियों में पाप बुद्धि ।

तीसरे द्रे० में चन्द्र हो-लोगों का घात करने वाला ।

(३) मिथुन के पहिले द्वे० में चन्द्र हो-पुरुष सुन्दर तेजस्वी ।

दुसरे द्रे० में चन्द्र हो-गुणहीन, परिभ्रमण करने वाला ।

तीसरे द्रे० में चन्द्र हो-रूप व गुण कम हो ।

(४) ककं के पहिले द्रे० में चन्द्र हो-सुन्दर व तेजस्वी । बूसरे ३० में चन्द्र हो-उग्न स्वभाव ।

तीसरे द्रे० में चन्द्र हो-सुन्दर हो पर उग्र हो । (५) सिह के पहिले द्रे० में चन्द्र हो-हिसा करने वाला, सुन्दर तेजस्वी । दूसरे द्रे० में चन्द्र हो-सुन्दर हो, परस्त्री से गमन करे । तीसरे द्रे० में चन्द्र हो-परस्त्रियों से गमन करे, उग्र हो । (६) कन्या के पहिले ३० में चन्द्र हो-परिभ्रमण करे । दुसरे द्रे में चन्द्र हो-परिभ्रमण करे । तीसरे द्रे० में चन्द्र हो-भ्रमण करे. दुर्गति हो । (७) तुळा के पहिले द्रे० में चन्द्र हो-कोमरू हो, भ्रमण करे । दुसरे ३० में चन्द्र हो-निस्तेज हो, भ्रमण करे । तीसर 8० में चन्द्र हो-सुन्दर हो, परस्त्री पर लक्ष करे । (८) वृश्चिक के पहिले ३० में चन्द्र हो-उग्र हो । दूसरे द्रे० में चन्द्र हो-सुन्दर ग्रुणवान्‌ हो, उम्र हो । तीसरे द्रे० में चन्द्र हो-सुन्दर तेजस्वी हो, परस्त्री से गमन करे | (९) घन के पहिले द्रे० में चन्द्र हो-तेजस्वी हो, हिसा, करने वाला हो ।

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