भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

पृष्ठ 93, कुल 454 में से

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पृष्ठ 93

२ बुध को दृष्टि हो-काव्य करे । ३ शुक्र की दृष्टि हो-सुखी । ४ गुरु की दृष्टि हो-शास्त्र पढ़े । ५ मंगळ की दृष्टि हो-पर स्त्री रत । ६ शनि-पर स्त्री रत ।

(२) मिथुन लग्न-के किसी नवांश में चंद्र हो उस पर ग्रह दृष्टि का फल- १ सूर्य को दृष्टि हो-कुश्ती खेले। २ मंगल की दृष्टि हो-चोरी करे । ३ बुध की दृष्टि हो-कविता करे । ४ गुरु की दृष्टि हो-कार्य भारी हो । ५ शुक्र की दष्टि हो-गायन करे । ६ शनि की दृष्टि हो-वढई हो शिल्पी ।

(४) ककं लग्न-में किसी नवांश पर चंद्र हो तो उस पर ग्रह दृष्टि फल-- १ सूर्यं की दृष्टि हो-दुवला । २ बुध की दृष्टि हो-तपस्वी । ३ मंगल की दृष्टि हो-कृपण । ४ गुरु की दृष्टि हो-मंती । ५ शुक्र की दृष्टि हो-स्त्री पालन करे। (६) शनि की दृष्टि हो-कार्य साधे । (५) सिंह लग्न-के किसी नवांश पर चंद्र हो उस पर ग्रह दृष्टि का फल । १ सूर्यं से दृष्ट-क्रोधी । २ मंगल से दृष्टि-राजा को प्रिय । हे बुध से दृष्ट-गड़ा द्रव्य लाभ । ४ गुरु से दृष्ट-सव पर हुकूमत करे । ५ शुक्र से दृष्ट-पुत्र न हो । ६ शनि से दृष्ट-घातकी । (६) कन्या लग्न-में किसी नवांश में चंद्र हो उस पर ग्रह दृष्टि फल--

१ सूर्य से दृष्ट-कुश्ती खेले । २ मंगळ से दुष्ट-चोरी करे। ३ बुध से दृप्ट-कविता करे।

षड्वर्ग तिचार : ८५

४ गुरु से दृष्ट-प्रधान हो । ५ शुक्र से दुष्ट-गायन करे । ६ शनि से दुष्ट-बढ़ई का काम करे। (७) तुला लग्न-के किसी नवांश में चन्द्र हो उस पर ग्रह दृष्टि का फल--

१ सूर्यं से दृष्ट-मूखं । २ मंगल से दुष्ट-पर स्त्री प्रेम । ३ बुध से दृष्ट-काव्य करे । ४ गुरु से दुष्ट-शास्त्र पढे । ५ शुक्र से दुष्ट-सुखी । ६ शनि से दृष्ट-दूसरी स्त्री तक जावे (८) वृश्चिक लग्न-के किसी नवांश में चंद्र हो उस पर ग्रह दृष्टि का फल￾१ सूर्य से दृष्ट-नगर रक्षक। २ मंगल से दृष्ट-घातकी । ३ बुध से दृष्ट-कलह करे। ` ४ गुरु से दृष्ट-राजा हो । ५ शुक्र से दृष्ट-जिमीदार हो। ६ शनि से दुष्ट-क्रलहकारी । (९) घन लग्न-के किसी नवाँश में

चन्द्र हो उस पर इन ग्रहों को दृष्टि का

फल

१ सूर्य से दृष्ट-वरूबान्‌ । २ मंगल से दृष्ट-युद्ध सिखावे । ३ बुध से दृष्ट-ठट्ठा करे । ४ गुरु से दृष्ट-मंत्री

५ शुक्र से दृष्ट-नपुंसक । ६ शनि से दृष्ट-धम बुद्धि हो । (१०) मकर लग्न-के किसी नवांश में चन्द्र हो उस पर ग्रह दृष्टि का फल-- १ सूये से दृष्ट-थोडी संतति । २ मंगल से दुष्ट-दुःखित । ३ बुध से दृष्ट-गविष्ठ।

४ गुरु से दृष्ट-स्वकुल प्रमाण ।

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