सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 95, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ेंषड्वर्ग विचार : ८७
गुरु स्वनवांश में हो-उत्तम मित्रस्थरीघन से सुखी, श्रेष्ठ प्रतिष्ठ,सुख सम्पत्ति पूर्ण । गुरु नवांश में चन्द्र-अनेक धन सम्पन्न, पुत्रों से युक्त, पुण्य धन से युक्त, अतिथि प्रिय, सवको आनन्द देने वाला । "गुरु नीच नवांश में हो सेवा वृत्ति से अपनी आजीविका चलाने वाला । नवांश का और भी फल विचार १ लग्न और नवांश आरम्भ में पूर्ण फल देते हैं।
मध्य में मध्यम ,, ४)
अन्त में अशुभ, ,, २ सौम्य ग्रह या मित्र ग्रह के अंश--शुभ होते हैं ।
पाव गा गा शत्रु [1 | 31 "अशुभ गा ३ सूर्य शनि मंगल के नवांश सब शुभ कर्मो में वजित है । शुभ ग्रहों के रवांश शुभ हैं शेष कु नवांश हैं ।
४ भावेश ग्रह नीच नवांश में-मीच स्त्री वाला ।
is उच्च , --राजा
» स्वनवांश में--कुल समूह का स्वामी हो ।
„ मित्र नवांश में-सेनापति तथा भोग और गुणों से सम्पन्न ।
» शत्रू, ,, दुःखित और अति मलिन ।
५ अपने उच्च या स्वार्थ में होकर उच्च आदि वाहनों में कुशल ।
ग्रह अन्त नवांश में हो-शूरवीर, बन्धु रहित ।
६ पंचम में मंगल और चतुर्थ में गुरुतो १, ३ या ५ पुत्र हों । नवांश कुण्डली में पंचम भाव में बुध शुक्र शनि हों-२, ४, ६ या ७ पुत्र हों ॥ ७ लग्न से तीसरे घर में सिंह राशि हो पंचम में गुरु केतु हो ] इन योगों में लग्न से छठे घर में शनि, सप्तम में सूयं, केन्द्र मे राहु और ? संतानहीन हा । दशम में मंगल हो । है। (=) व्ययेश ग्रह कूर हो वह ९, ६, ३ या १२ घर में हो या ५ घर में केतु
हो=पुत्र हो होकर मरे ।
(९) जितने पुरुष ग्रह बली होकर लग्न से पंचम में हों या पंचम को देखें-उतने पुत्र हों ।
(१०) चन्द्र, शुक्र और बुध से युक्त या दृष्ट पंचम घर में हो=कन्या होती है ।
(११) पंचम ग्रह पूर्ण वली शनि से युक्त या दृष्ट हो-गर्भपात हो ।
ये सब नवांश कुण्डली से विचारना ।
मतांतर--उक्त बातें चन्द्र के नवांश से विचारना ।
नवांश के अनुसार धातु मूल जीव संज्ञा
विषम राशि में प्रथम नवांश से आरम्भ होकर धातु मूळ जीव से ३ आवृत्ति होती है।
सम ग २ 11 शा जीव मूल घातु से | 22