भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

पृष्ठ 106, कुल 418 में से

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९० : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

शिर पीड़ा या सिर काटे जाने की संभावना । मंगल रुग्न में हो तो खुजलो

और दाद से युक्त हो ।

२ उपबेशन--नीच आचरण, क्रूर, रोगी, दुगुंणी, सम्बन्धियो से त्यक्त, बलवान, पाप

कर्ता; मिथ्या वादी, दरिद्र, धनवान, घमंहीन, यदि लग्न पे हो तो उपरोक्त

फल हो । यदि मंगल ९वें घर में हो तो कई प्रकार से हानि करे उसको

स्त्री-पंतान न जिये । परन्तु मङ्गल उच्च का हो तो इसके विरुद्ध फल होने

की सम्भावना है।

३ नेन्रपाणि--लम्न में हा तो नेत्र खोवे, स्त्री सन्तान, धन खोवे, सदा गरोव रहे ।

अन्य घर में हो तो सब प्रकार आनन्द भोगे, स्त्री सन्तान धन होवे ओर

कुछ निद्रालु हो, अङ्ग के जोड़ों में दोष हों, बाघ सर्प अग्नि और जळ से

भय हो, परन्तु किसी नगर का स्वामी होता है। मङ्गल सप्तम घर में हो

तो कामदेव के निमित्त से भंग, सपं, दाँतों से काटने से अग्नि रो या जल मे

भय, पत्नी का अभाव हो 1

४ प्रक्ाशन--धनी और कुछ समय के लिये आनन्दित रहे, बांये आँल में कुछ चिन्ह या

दाग हो, ऊँची जगह से पतन, गुण का विकाम हो, राजा से आदर हो, लग्न

से पञ्चम घर मे हो तो सब समय परदेश मे निवास करने वाला गुण रहित

होने पर भी राजा से मान पाये परन्तु स्त्रो पुत्रों का नाश करे । मङ्गल प्रका-

शन अवस्था में पाप ग्रह युक्त होकर या पाप ग्रहों के बोच होकर पञ्चम घर s

हो तो यह कुकर्मी हो । राहुँ से युक्त हा तो महा पतन होता है, पुत्र स्त्री से

वियोग, वृक्ष से पतन या लाठी की चोट से दुःख ।

५ गमनेच्छा-बिदश वास, गुप्तांग में रोग, भरीव, बुरे कर्म का प्र मो, नित्य गमन करने

वाला, घाव का भय, स्त्री से कलह, दाद खाज युक्‍त, शस्त्र से भय, घन

की हानि ।

६ गमन-सदा उदास, दाद खाज या दूसरे चमं रोग, पित्तज पीड़ा, अङ्ग के जोड़ों

प्रे पीड़ा, काये शील, शान्त, अपनी स्त्री के प्रभाव में, बातूनी, नेत्र हानि,

दन्त और सिर के रोग, दोष युक्त चर्म, जल से भय में विचित्रता, गुणी, मणि

रत्न से युक्त, तीक्ष्ण खडग धारण करे, कत्रुओ का नाशक. परिजनों का

पालक, गज समान गति, यदि लग्न में हो तो सब बातें लाम जनक हों ।

यदि गमन अवस्था से और किसी अवस्था में हो तो उपरोक्त अगुभ बातें न

होंगी परन्तु वह धनो योग्य, दानी होकर सुख भोगे और आलसी हो ।

७ सभावसति-गुण, घन, सम्पत्ति याग्यता देवे, दान को ओर झुकाव, सिर का रोग हो ।

मङ्गल उच्च पञ्चम नवम घर में हो ता युद्ध कला में प्रवोण, धर्म रहित,

. घन युक्त परन्तु विद्या से हीन, सत्कायं में बाधा । वारहुवे हो तो स्त्री पुत्र

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