भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

पृष्ठ 118, कुल 418 में से

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१०२: ज्योतिष-शिक्षा, qata फलित खण्ड

( २१ ) कलह (झगडा) ( ३६ ) प्रहषं ( जीने पर हर्ष )

( २२ ) प्रयाण (यात्रा को प्रस्थान) ( २३) उन्मत्तता ( पागल या नशे में

( २९ ) शास्त्रलाभं ( शास्त्र आदि उन्मत्त ;

का लाभ होना ) (२४ ) सलिलाप्लवनं (जल में तैरना)

( ३० ) स्वैरं ( उद्ण्डता आदि ) a, र ५ ) विरोध ( वेर

( ३१ ) गोष्ठो ( वार्तालाप ) BU (र) ( ३२) योधने ( युद्ध करना ) ( २६) स्वेच्छा ( अपनो इच्छानुसार

( ३३ ) पुण्य कमं (पुण्य कमं करना ) कि 22028 )

( ३४ ) पापाचार ( पाप कर्म करना ) | (२७) स्तानं (स्नान करना )

( ३५ ) क्रूरकर्मा ( क्रूर कर्म करना ) ( २८ ) क्षुङ्धयं ( क्षुघा का भय )

चन्द्र वेला जानने की रीति

जन्म नक्षत्र की भुक्त घडीपल के पल बना कर १०० का भाग दो तो लन्च चन्द्र

वेला होगी, यदि शेष बचे तो आगे का लेना ।

उदाहरण- जन्म नक्षत्र घनिष्ठा क भुक्त घडी N: 5 = २२२३ पल

पल

१००) २२२३ ( २२ लब्धि ` यहाँ लब्चि २२. गत हो गई शेष बचा है तो

` २०० गत १ जोड़ कर आगे का २३ वां लिया । २३ =

२२३ उन्मत्तता वेला प्राप्त हुई ।

२०० ° यहाँ बताये चन्द्र अवस्था, क्रिया, वेला

२३: का विचार जन्म, प्रश्‍न, मुहुर्त आदि में कर

उनका फल विचारना । इनमें नाम सदृश फल होना है 1

अध्याय ६

ग्रह कारक

प्राणी मात्र का सुख दुःख जिन ग्रहों के प्रभावपर निभंर है उनके कायं में कर्ता ग्रह

को कारक कहते हैं ।

प्रत्येक ग्रह का कायं भिन्न है और ये घटनाओं पर अपना प्रभाव डालते हैं । इस

कारण बताया गया है कि कौन ग्रह किस कार्य का कारक है । अर्थात्‌ किस ग्रह से क्या

बातें विचारनी चाहिये यह आगे दिया है उन बातों के कारक या अधिकारी प्रभाव कर्ता

वे ग्रह हैं जो आगे बताये हैं ।

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