सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 119, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ेंग्रहों कीईअवस्थाए और चन्द्र क्रिया : १०३
ग्रह के कारक
१ सूर्य---पिता का सुख, शरीर का सुख, पूर्व पुन्याई, मन की रुचि, राज्य कार्य, बड़े
भाई का सुख, वैद्यक विद्या, समीप या प्रयाण ( यात्रा ), श्रीमान और अघि-
कारी लोगो से मित्रता, राज विद्या, राज से मान सम्मान, श्रेष्ठ अधिकारी
सत्ताधारी योग, राज्याधिकारी वर्ग, लोक मान्यता, प्रसिद्ध नेता, राष्ट के
कर्णधार, बड़ी संस्थाओं के कर्णघार, जागीरदार, दीवान आदि व राज सेवा,
उपजीविका वोरता, योग्यता, तत्त्व ज्ञान, मन की शुद्धि, आत्मा, फजूल खर्ची,
स्वर्ण, अश्व, पद्मराग मणि; सिंहासन, रक्त तात्र, ब्रण, भेषज, शौर्य, नेत्र चिकित्सा,
प्रताप, बड़प्पन, धैर्य, सामर्थ्य, ( शक्ति ) साहस, युद्ध में जीत, शिव ईश्वर
के सम्बन्ध का कोई कार्य, जंगल वा पहाड़ो स्थान का जाना, होम यज्ञ कायं में
प्रवृत्त होना, देव स्थान, स्वभाव, निरोगता, लक्ष्मी का विचार, ज्ञान का उदय,
भाग्य, राजनैतिक शक्ति, पिता औरं पिता की ओर के सम्बन्धी, क्षत्रिय, रक्त
वस्त्र, रक्त चन्दन, मू गा, माणिक्य, गोधूम, गुड, केशर, कमल, नवीन गुड,
सवत्सा गौ आदि का ।
२ चन्द्र--मातृ सुख, सौन्दर्य सुख, यश प्राप्ति, ज्योतिष विद्या की रुचि, दूर का प्रयास,
जल प्रयास, मन बुद्धि, स्वास्थ्य, राज ऐश्वर्य, सम्पत्ति, सुगन्धित वस्तुओं का
शौक, वाइन: सुख, द्रव्य सञ्चय, धंधे में उन्नति, प्रजा पक्ष, जनता, सामान्य
लोग, जनता की वृत्ति, प्रजा पक्षीय नेताओ के मन को स्थिति तथा स्त्री मन,
आनन्द, चाँदी, चेहरा, कीति, दूध, यात्रा, वस्त्र, जल, कृषि, घन, गौ, शस्य,
लज्जा, मणि, शङ्क, विनय, पुष्प रस वर्ग, घातृ, दीप्ति, सन्तोष, समुद्र स्नान,
सफेद चादर, छत्र, सुव्यजन ( पंखा ) कोमलता, मुक्ता प्राप्ति, कांसा, सख
भोजन, प्रसन्नता, राजा, दया, हर्ष, हृदय की चेतना शक्ति, बुद्धि, राज कृपा,
ब्राह्मण, श्वेत वस्त्र, श्वेत चन्दन, श्वेत चावल, श्वेत पुष्प, घृत, दही, कपूर,
बैल, गेहूँ, लवण, वंश पात्र आदि का कारक है ।
३ मङ्गल--साहस, लघुआता सुख, पराक्रम, घैयं, अभिमान, शत्र कीति, बुद्धि के
आचार कार्य, युद्ध, नेतृत्व, धनुबिद्या, रोग घातु, विद्या, रक्त विकार, पास्त्रः
क्रिया ( आपरेशन ), युद्ध, लड़ाई; अग्नि, प्रलय अपनी सामर्थ्यं का घमंड
सेनापति, सेना, दुर्ग, क्रूरता, विजय, भूमि, भाई, क्रोध, पित्तविकार
ऋण, सोना, कृषि, शिव भक्ति, नुकताचीनो करना, काम, प्रलाप, उत्साह,
परस्त्रीरत, पाप, घाव, हाकिमो, युवराजत्व, उषण, बाहुबल, ताम्र, मूंगा,
माणिक्य, दण्ड नोति,. गृह, विष, कीट, वंश, खेर, गन्धक सिंह, व्याघ्र,
बल, विद्वेष, पकाने के बर्तन, अग्नि, अस्त्र, चौर, श मिथ्या-भाषण, .
मानसिक विचारों को उच्चता, पुत्र, खज्ग, पर्सा, कुल्हाड़ा, तोप, धनुष, बाण,
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