भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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१०४ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतोय फलित खण्ड

आदि, गम्भीरता, कलंक, स्वातंत्र्य, आचरण के गुण, रक्त के सम्बन्ध के

बन्धु, बहिन ( पितृ वंश के ), उद्योग, शाला, पुत्र, मसूर, गोधूम, केसर,

कस्तूरी, रक्त वस्त्र, रक्त पुष्प, रक्त चन्दन, रक्त वृष, गुड़ ।

४ बुघ--युवराज, कौमार, बंधु सौख्य, बुद्धि, विद्या ववतृत्व शक्ति, प्रवीणता, मित्र सुख,

मनः शान्ति, सम्पत्ति, स्वतन्त्र धन्या, वाणी, लेखन कला, वेदान्त विषय की

रुचि, कला कौशल, ज्योतिष विद्या की रुचि तथा ज्ञान, गणित शास्त्र,

विद्वत्ता, विवेक, लेखक, ग्रन्थकार, वक्ता, सम्पादक, मुद्रक, प्रकाशक पर￾राष्ट्रीय मन्त्रो, कारभारी, व्यापारी, सराफी का धन्या, ज्योतिषी, वकीली

आदि घन्धा, तत्व ज्ञान, विष्णु की भक्ति, व्यापार, चाक्य चातुर्य, उपासना

आदि में पटुता, घर्म, चाची, मामा, मौसी, मामी, बान्धव, सुहद्‌, बहन को

सन्तान, युवराज सन्तान, शान्ति, नर्मता, हास्य, नृत्य, वैद्य, भय, दासी,

मुद्ग मैथुन, तरुण, शस्य, यजन, कोलाहल, माध्यस्थ्य, चित्र क्रीड़ा, सौभाग्य,

शुक्र, पिजरा, ताम्बूल, पलास, कांसा, सुवर्ण, सीप, गजदन्त, मूंगा, घृत,

पन्ना, पुष्प, रत्न, कर्पूर, फल, शस्त्र, षटरस, सत्य भाषण, क्रीडास्थल ।

५ गुरु सन्तति, सम्पत्ति, ज्ञान, अधिकार, ऐक्वयं, राजसन्मान, लोक संग्रह, वेदान्त

ज्ञान, घन्धा, उपजीविका, मल्ल विद्या, तीब्र बुद्धि, ग्रहण शक्ति, धर्माभिमानी,

ग्रन्थकर्ता, स्थिर वृत्ति, राज कारण, परोपकारी, घामिकक्नुत्य, वाहन आदि

सुख, धर्म गुरु, संस्कृत विद्या, व्याकरण, शास्त्र, अधिकारी, न्यायाधीश,

वकील, श्रीमान, व्यापारी, जागीरदार, शान्तिप्रिय, संस्थापक आदि ।

स्वास्थ्य, घन, कोमल वाणी, पुत्र, घरेलू आनन्द, मन्त्रीपना, सचिव, उचित

व्यय आत्मज्ञान, स्वतन्त्रता, दान, हृदय, कविता, वेद वेदान्त, ब्राह्मण्य,

भवित, श्रद्धा, मेधा, प्रणय, सदाचार, वैष्णव, गौरव, प्रज्ञता, प्रवचन,

पाण्डित्य, विद्या, सुख, आचायं, माहात्म्य, सदगति, देव ब्राह्मण भक्ति, बलि,

तप, जितेन्द्रिय, कोष स्थल, पति का सुख, सन्मान, धन, जीवन का उपाय,

कमं योग, सिंहासन, शारीरिक विकास, पितामह, देव ब्राह्मण, गृह, पीत वस्त्र,

पीत घान्य, पीत पुरुष, पीत फल, सुवणे, पुखराज, मधु, हल्दो, लवण,

गज, छत्र, सत्कर्म, अध्ययन, मित्र, कातंस्वर, शिष्टत्व, जथपत्र, कीति, श्रुति

शास्त्र और स्मृति ज्ञान, सर्व उन्नति, वाहन, अनेक रंग के वस्त्र ।

६ शुक्त--स्त्री, व प्रापञ्चिक सुख, कवित्व, गायन, वादन कला में निपुण, प्राचीन

संस्कृति का अभिमानी, सौन्दर्य के प्रति प्रीति, विषय सुख इन्द्रिय आनन्द,

सुगन्ध पदार्थ का प्रेमी, कला-कीशलप्रिय, द्रव्य लाभ, स्वतन्त्र धन्या,

राजाश्रय, राजकायंभार का ज्ञान, अलङ्कार, यान्त्रिक विद्या, अष्ट सिद्धि,

साहित्य ज्ञान, व्यापार, होरा, मोतो, कपास का व्यापारी, शेयर, ऐश

आरामी, देश की सम्पत्ति, विवाह, कोति, सुन्दरता, ललित कला, गाना

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