भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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ग्रह कारक : १०५

नाचना, कविता आदि, आनन्द, बुद्धि, तमाशा, व्यभिचार, कुटुम्ब, नेत्र, अकाश, शयन गृह, वाहन, देवी की भक्ति, हाथो घोडे आदि वाहन सुख, मन्त्रित्व, सहनशील, स्त्रो संभोग, स्वतः के द्रव्य के सम्बन्ध का ज्ञान, काम- क्रीडा, मन्दिर, उन्नति, विलास, सुन्दर भाषण, उत्सव, दासत्व, रस, अद्भुत (रस), सुन्दरता, राजा, राजपुरुष, वशीकरण, गरुड़ विद्या; इन्द्रजाल, चातुरी, भाग्य, आचरण, सुख, गौरव, विभव, श्वेत तण्डुल, इवेत चन्दन, चित्र वस्त्र, श्वेत पुष्प, घृत, दघि, सुवणं, चाँदो, हीर', सुगन्ध द्रव्य, गौ, भूमि, कौमार, यौवन, अवस्था और रस, सृष्टि, सोभाग्य, सुभोजन, शैया

सुख, विनोद पुष्प गन्ध, मन्द, भोगस्थान, वेश्या रति, स्त्री जन के शरीर,

वेत वस्त्र ।

७ शनि--आयुष्य, दुष्ट बुद्धि, लोभ, मोह, घात कर्म, रोगी, सरकारो आरोप, राज दण्ड,

कंद, उद्योग हानि, दासत्व, नीच विद्या, मजदूर वगग, खेती, खनिज, नौकर

वर्ग, पराधीनता, विश्‍वासघात, कामगार, प्रेस का स्वामी, अशिक्षित, कायदा-

कानून में प्रवीण, नपुसकता, मिथ्यापन, पाप, नरक, शोक, अंग्रेजी शिक्षा,

जुआ खेलना, मदिरापान, मृत्यु दण्ड, जीवन, पेट, लिवर, वातव्याधि, कष्ट,

क्लेश, पराभव, भय, पतित होना, दुःख अपमान, रोग, अपवाद, कुलीपना,

अशौच, निन्दा, आपत्ति, बुढापा, स्थिरता, नीच जन आश्रय, तन्द्रा, ऋण,

महिष, लोहा, नोछ वस्त्र कम्बळ, गर्देभ, पादुका, दलिया, कृष्ण अन्न,

माषान्न, तिल तेल, कृष्ण वस्त्र, कुल्यी, कृष्णघेनु, कृष्णपुष्प, जूता, कस्तुरी,

गज, नीलम, - आयुर्दाय, जीवन का उपाय, सवं राज्य, आयुष, शूद्र, भूत्य,

(सेवक) विघ्न, शल्य, शूल रोग, बात, कृषि साधन, मृत्यु का कारण, ठगी,

मोह, लोभ, पर पीडा, निष्ठुरता, दरिद्रता, दुर्दशा और पुत्र ।

८ राहु-- आजा का सुख, गारुडी विद्या, आकस्मिक घटना, भूत बाधा, अरुचि, राज

छत्र, सन्मान, अंग्रेजी शिक्षा, बगीचा, राज्य, नाना, म्लेच्छ प्रताप, धूप,

इमशान, तस्कर भेद, विधवा, व्यौहार, शिला, बाल्मीक, चमं, ज्वर, अप￾स्मार, विशूचिका, संकोच, देशाटन, बैराग्य, बलात्कार, भ्रष्टता, घोर युद्ध,

पितामहे, यश, प्रतिष्ठा, छत्र का कारण, अन्धेरापन, विष, सपं, यात्राकाल,

द्यूत, माषान्न, सप्त धान्य, गोपद, नील वस्त्र, खड्ग, तिल तैछ, लोह,

कस्बल, घोडा, कृष्ण पुष्प, ताम्र पात्र, महारण्य, महोत्पात, सुख कष्ट

आदि ।

९ केतु-- तन्त्र, मन्त्र, गुप्त विद्या, आजी का सुख, एक तन्त्री विचार, मन्त्र सिद्धि के

प्रयत्न, युक्ति, गंगा स्नान, मन्त्र शास्त्र, आत्मज्ञान, विष, ज्वर, शंका,

तत्वज्ञान की ओर मन का झुकाव, वैराग्य, तीर्थाटन, भिक्षाटन, क्षोभ,