भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

पृष्ठ 123, कुल 418 में से

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ग्रह कारक : १०७

आशय यह है कि किसी भी बात के विचारने में केवल ST भाव के ग्रह या उस भावेश के हो विचार करने से काम न चलेगा किन्तु उस विपय के कारक ग्रह का भी विचार कर कारक ग्रह का शुभाशुभत्व, ग्रहों की युति और दृष्टि एवं स्थिति आदि पर भी विचार करना आवश्यक है। इस कारण किसी फल के निर्णय करते समय उसके

कारक ग्रह की स्थिति आदि पर पूरा विचार करना आवश्यक है तभी ठीक फल

निकलता है 1

सुख दुःख के कारक ग्रह पर विचार

मन में सुख की इच्छा स्वाभाविक होती है परन्तु प्रत्येक प्रकार के सुख की परिभाषा भिन्न है । यहाँ वताया है कि किस ग्रह से किस प्रकार के सुख का विचार करना ।

गुरु शुक्र से--धन की स्थिति एवं द्रव्य लाभ का विचार ।

शुक्र से--स्त्री व प्रापञ्चिक सुख ।

रवि चन्द्र से--शारीरिक एवं मानसिक सुख ।

गुरु से- बुद्धि विद्या एवं सन्तति सुख ।

रवि गुरु शनि से--नौकरी अधिकार राज सम्मान ।

शुक्र बुध से--व्यौपारं या लेनदेन के धस्थे साहुकारी आदि ।

मंगल से--साहस, पराक्रम या यश का विचार करना ।

सुख का विचार करने के प्रथम कुंडली में इन ग्रहों का शुभाशुभ स्थिति आदि का

विचार करना चाहिये । इनकी शुभाशुभ स्थिति के अनुसार प्रत्येक को हानि या लाम

होना निश्चित है । इन ग्रहों का फल कुण्डली में इन ग्रहों के उच्च, नोच राशि, अंश,

गुण; दृष्टि आदि के अनुसार मिलता हे । इस कारक फल का विचार करते समय कारक

का अवश्य विचार, करना ।

भावेश और कारक में अन्तर है'

भावेश और किसी विषय का कारक भिन्न है । जैसे चौथा भाव कृषि माता भूमि

शिक्षा वाहन और पशु का है तो उस भाव के स्वामी से विचारने के अतिरिक्त उस भाव

के कारक से भी फल विचारना । इन भिन्न २ विषयों के कारक ग्रह पृथक्‌ २ ë परन्तु

उस भाव का भावेश एक ही हूँ । जिस विषय को विचारना हैँ उसका कारक कोन ग्रह

है उससे फल निकालना ।

जैसे पाँचवां घर सन्तान और मन्त्रणा शक्ति का है । मानो मेष लग्न है तो षञ्च￾मेश सूर्य होगा जो सिंह का स्वामी है । परन्तु पुत्र कारक गुरु है यें दोनों अर्थात सूयं

और गुरु शक्तिशालो हों ता अच्छी और उन्नति शोल सन्तान होतो. हैं । परन्तु मन्त्रणा

शक्ति का कारक शुक्र है इससे शुक्र से भो विचार करने से मन्त्रणा शवित का फळ

प्रकट होगा ।

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