सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 128, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ें११२ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
` ९ पूर्ण चन्द्र हो--भोगी, विद्या से जीविका चलावे ।
३ शुक्र की दृष्टि या योग हो--विशेष योगी और विद्वान हो ।
४ मंगल हो--माळा रखने वाला, अग्नि से जीविका करने वाला तथा दसों का
जानने चाला ।
५ बली बुध हो--कला और शिल्प विद्या में निपुण, व्यापार दक्ष, कपडा बिनने वाला या
चित्रकार या व्यापारी ।
६ गुरु हो--सुकर्म करने वाला ज्ञानी, वेदज्ञ ।
७ शुक्र हो--शताब्द जीवी (१०० वर्ष की आयु), कामी, राज्य कर्म करने वाला ।
८ शनि हो--प्रसिद्ध कर्म से जीविका करने वाला ।
९ राहु हो--धनुर्धारो, चोर, विष विद्या जानने वाला, (विष वैद्य) लोह यन्त्रादि बनाने
वाला ।
१० केतु--हाथियों आदि का व्यापार करने वाला, चोर ।
विशेष विचार
(१) कारकांश राहु से युकत--सूर्य हो तो सपं से भय या मृत्यु, शुभग्रह की दृष्टि हो तो
सर्प से मरण नहीं होता, या भय टल जाता है । पाप दृष्टि हो तो सपं से मृत्यु हो।
` इसमें शुभग्रह का पड्वर्ग हो या शूभ सम्बन्ध हो तो विषवेद्य हो । इसमें केवल
मंगल की दृष्टि हो तो अपने या दूसरे का घर जछाने वाला । Tasa दृष्टि होकर
शुक्र भी देखे तो गृह दाह रने वाला नहीं होता है । मंगल की दृष्टि होकर बुध
भो देखे तो गृह दाह करने वाला नहीं होता है । मंगल की दृष्टि होकर गुरु भी देखे .
तो स्वगृह और समीप के ग्रह जलावें । पाप ग्रह का षड्वर्गं हो और गुरु को दृष्टि
हो तो समीप के ग्रह सहित इष्ट घर जलावे ।
(२) यदि कारकांश में गुलिक हो तो दूसरों को विष देवे या स्वयं विष खाकर मरे।
यदि कारकांश में गुलिक हो चन्द्र की दृष्टि हो-उसका घन चोर ले जाय या रवयं
चोरी करने वाला हो ।
उसमें केवल बुध की दृष्टि हो तो बड़े अंड कोष वाला हो ।
(३) केतु युक्त कारकांश पर पाप ग्रह को.दृष्टि-कणे रोग हो या कणंच्छेद हो ।
उसपर शुक्र की दुष्टि-जातक दीक्षित हो, यज्ञादि में मन्त्र ग्रहण करे ।
शनि और बुध की दृष्टि ही-निबंल हो ।
बुध ओर शुक्र की दृष्टि हो-दासी पुत्र या पुनभू का पुत्र हो या एक ही बात को
फिर २ बोलने वाला sl!
शनि और अन्य ग्रह की दृष्टि हो तो तपस्वी या भृत्य हो 1