भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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११२ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

` ९ पूर्ण चन्द्र हो--भोगी, विद्या से जीविका चलावे ।

३ शुक्र की दृष्टि या योग हो--विशेष योगी और विद्वान हो ।

४ मंगल हो--माळा रखने वाला, अग्नि से जीविका करने वाला तथा दसों का

जानने चाला ।

५ बली बुध हो--कला और शिल्प विद्या में निपुण, व्यापार दक्ष, कपडा बिनने वाला या

चित्रकार या व्यापारी ।

६ गुरु हो--सुकर्म करने वाला ज्ञानी, वेदज्ञ ।

७ शुक्र हो--शताब्द जीवी (१०० वर्ष की आयु), कामी, राज्य कर्म करने वाला ।

८ शनि हो--प्रसिद्ध कर्म से जीविका करने वाला ।

९ राहु हो--धनुर्धारो, चोर, विष विद्या जानने वाला, (विष वैद्य) लोह यन्त्रादि बनाने

वाला ।

१० केतु--हाथियों आदि का व्यापार करने वाला, चोर ।

विशेष विचार

(१) कारकांश राहु से युकत--सूर्य हो तो सपं से भय या मृत्यु, शुभग्रह की दृष्टि हो तो

सर्प से मरण नहीं होता, या भय टल जाता है । पाप दृष्टि हो तो सपं से मृत्यु हो।

` इसमें शुभग्रह का पड्वर्ग हो या शूभ सम्बन्ध हो तो विषवेद्य हो । इसमें केवल

मंगल की दृष्टि हो तो अपने या दूसरे का घर जछाने वाला । Tasa दृष्टि होकर

शुक्र भी देखे तो गृह दाह रने वाला नहीं होता है । मंगल की दृष्टि होकर बुध

भो देखे तो गृह दाह करने वाला नहीं होता है । मंगल की दृष्टि होकर गुरु भी देखे .

तो स्वगृह और समीप के ग्रह जलावें । पाप ग्रह का षड्वर्गं हो और गुरु को दृष्टि

हो तो समीप के ग्रह सहित इष्ट घर जलावे ।

(२) यदि कारकांश में गुलिक हो तो दूसरों को विष देवे या स्वयं विष खाकर मरे।

यदि कारकांश में गुलिक हो चन्द्र की दृष्टि हो-उसका घन चोर ले जाय या रवयं

चोरी करने वाला हो ।

उसमें केवल बुध की दृष्टि हो तो बड़े अंड कोष वाला हो ।

(३) केतु युक्त कारकांश पर पाप ग्रह को.दृष्टि-कणे रोग हो या कणंच्छेद हो ।

उसपर शुक्र की दुष्टि-जातक दीक्षित हो, यज्ञादि में मन्त्र ग्रहण करे ।

शनि और बुध की दृष्टि ही-निबंल हो ।

बुध ओर शुक्र की दृष्टि हो-दासी पुत्र या पुनभू का पुत्र हो या एक ही बात को

फिर २ बोलने वाला sl!

शनि और अन्य ग्रह की दृष्टि हो तो तपस्वी या भृत्य हो 1