भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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११४ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

पञ्चम में बुध हो तो-परमहंस या दंडी हो ।

रवि ,, -खड्गघारी हो ।

मङ्गल ,, -माछा रखने वाला ।

शनि ,, -धनुष रखने वाला या धनुविद्या में निपुण ।

राहु ,, —g यन्त्री ( लोह यन्त्र बनाने वाला )

केतु ,, -घटी यन्त्र बनाने वाला या घड़ी साज ।

शुक्र ,, "कवि वक्ता और काव्य को जानने वाला हो ।

कारकांदा ओर उसके पञ्चम स्थान का विदोष फल

आरमकारक या उससे पञ्चम में चन्द्रमा और गुरु हो-प्रन्य बनाने वाला (ग्रंथकार)

और सब विद्या जानने वाला हो ।

चन्द्र और शुक्र हो-उपयोग की अपेक्षा कुछ-न्यून ग्रन्य बनाने वाला ।

चन्द्र और बुध हो-भोर भो न्यून ग्रन्थकार ।

केवल गुरु हो-सवंज्ञ ओर ग्रन्थकार वेदान्त, शब्दज्ञ तथापि अधिक वक्ता नहीं

होता ।

मङ्गल हो-नैयायिक ।

बुध हो -मीमांसक ।

शनि हो -सभा में मूक ( सभा जड़ )

सूर्य हो -गीताज्ञ, वेदान्त और ज्ञान जानने वाला ।

चन्द्रमा हो-साँख्य योग साहित्य और सद्धोत जानने वाला ।

राहु या केतु-गणितज्ञ 1

é

इन दोनों में गुन का सम्बन्ध हो तो उसे सम्प्रदाय को मिदि होतो है ।

कोई कारकांश से द्वितीय स्थान से भी इन फलों को कहते हैं ।

कुछ आचायं तृतीय स्थान से भी इसी प्रकार का ws विचारते हुँ ।

कारकांश से षष्ठ स्थान का फल

कारांश से षष्ठ स्थान में पाप ग्रह हो-कृषि कर्मा हो ।

शुभ ग्रह „आलसी ।

तृतीय स्थान से भी यही फल विचारना ।

सप्तम स्थान का फल कारकांश से सप्तम में चन्द्र व गुरु का योग या दृष्टि हो-अति सुन्दरी स्त्री हो ।

सूयं व गुरु शा योग या दृष्टि हो-अपने कुल में रक्षिता और विकलांगो ।

शनि » रु -आयु से अधिक, तपस्विनी या रोग-युक्ता

स्त्री हो ।

राहू = -विधवा स्त्री का संग होता है । अर्थात्‌

विधवा से सम्बन्ध हो ।