भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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ग्रह कारक : ११५

मद्धळ का योग या दृष्टि हो कुल लक्षण से युवत अङ्ग वाली स्त्री | चुन c pp गीत वाद्य आदि कलाओं में निपुण ।

फारकांश से अष्टम स्थान का फल

कारकांश से अष्टम में शुभ ग्रह हो और अपने स्वामी से युका या दृष्ट हो-दीर्घायु ।

n x” पाप दृष्टिया युक्त -- अल्पायु ।

" „» दोनो से युक्त या दृष्ट -- मध्यमायु ।

कारकांश से नवम स्थान का फल

कारकांश से नवम में शुभ ग्रह की दृष्टि या योग-सत्यवक्ता और धर्मात्मा, गुरु भक्त पाप ग्रह की दृष्टि या योग-बाल्यावस्था में अपने घमं में रहता है । वृद्धावस्था में धमं का त्याग कर मिथ्यावादी होता है । असत्य भाषी, गुरु का अभक्त ।

शनि या राहु से युक्‍त या दुष्ट-गुरु द्रोही वाल काल में शास्त्र से विमुख हो ।

सूर्य या गुरु गै n गुरु द्रोही, गुरु का वाक्य न माने अविश्वास करे। शुक्र या मङ्गल का षड़वर्ग हो या युक्त दृष्टि हो-दूसरे की स्त्री को मारने वाला

या परस्त्री रत ।

शुक्र या मङ्गल का पड़वर्ग और गङ्गल और शुक्र की दृष्टि हो-मरण पगंन्त

परस्त्रीरत ।

बुध, चन्द्र, युत या दृष्ट-पर स्त्री सम्बन्ध में त्रन्धन प्राप्त हो ।

केवल गुरु की योग दृष्टि-अपनी स्त्री में आसतत, स्त्रीठोलुप विषयी ।

केतु ,, मरने तक परस्त्री में आसक्त नहीं रहता परन्तु पर￾स्त्री रत होता है ।

राहु णा पर स्त्री के लिये घन का नाश ।

नवम में गुरु हो-विशेष कर खेती करने वाला हां ।

वशम स्थान का फल

कारकांश से दशम में शुभ ग्रह या योग या दृष्टि-स्थिर धन वाला, गम्भीर, बली,

बुद्धिमान ।

पाप ग्रह का योग या दृष्टि-व्यापार में हानि, पिता के सुख से होन ।

बुध शुक्र दोनों का ,, „ व्यापार में अनन्त लाभ बड २ कार्य करने वाला ।

सूर्य चन्द्र से और गुरु से युत या दृष्ट-राजा हो ।

बुध का योग का दृष्टि-प्रसिद्ध कमं से जीविका करने वाला |

बुध से शुभ ग्रह की दृष्टि-पुरोहित या विवाद का निर्णय करने वाला हो t

रवि हो और केवल गुरु से दृष्ट हो-गौरक्षक |