सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 135, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ेंग्रह कारक: ११९
छोड़ कर केवल दशम स्थान में हो तो कारक नहीं होता क्योंकि उसे स्वक्षीत्र आदि का अधिकार नहीं है ।
(११) कारक ग्रह यात्रा व युद्ध के समय अवश्य देखना चाहिये क्योंकि उस समय (१) नीच का ग्रह (२) पराजित ग्रह (३) या लग्नेश का शत्रु ग्रह हो तो इन ३ ग्रहों की दशा में गमन नहीं करना ।
(१२) जन्म लग्नेश की दशा या उसके मित्र की दशा में या चन्द्र से दूसरे स्थान में शुभ ग्रह है तो उसकी दशा में या जिस:राशि का कारक है वहाँ उस राशि में चन्द्र ë तो युद्ध या यात्रा करने में सौख्य, धन प्राप्त होता है । इसके अतिरिक्त अन्य की दशा मे कष्ट होता है ।
(१३) सूर्य से दूसरे स्थान में शुभ ग्रह बुध, गुरु, शुक्र में से कोई हो तो जन्म सफल जानो । (१४) चार केन्द्र में से एकाघ केन्द्र में ग्रह न. हो तब भी जन्म सफल जानो । (१५) जन्मकाल में कारक ग्रह जिसे है उसका जन्म शुभ होता है जितना विशेष गुण हो उतना शुभ होता है।
(१६) यदि जन्म या यात्रा काल में शुभ ग्रह केन्द्र में न हो तो वह जन्म या यात्रा शुभ नहों समझना ।
(१७) जिसके देखि संज्ञक स्थान में ( सूर्य से दूसरे स्थान में ) शुभ ग्रह हो और लग्न और जन्म राशि अपने नवांश में स्थित हो और समस्त केन्द्र ( चारों केन्द्र ) शुभ ग्रहों से युक्त हों उसके घर में लक्ष्मी वास करती है अर्थात् कई पीढ़ियों तक द्रव्य का अभाव नहीं रहता ।
“ इस योग में जन्म लग्न ही केवल अपने नवांश में हो तो भी उपरोक्त फल होगा ।
(१८) जिसका गुरु, लग्नेश ओर जन्म राशि का स्वामी केन्द्र में बैठे हों उसका भाग्य
मध्यावस्था में (जवानी में) उदय होता. ह अर्थात् सुख हो, भाग्य का विस्तार हो।
(१९) उपरोक्त गुरु, लग्नेश और जन्म राशीश यदि .शीर्षोदय राशि में हों तो गुरु से
बालपने में, छग्नेश से मध्यावस्था में, और चन्द्र राशोश से बृद्धावस्था में भाग्यो-
दय होगा अर्थात् इनमें से जो भी शीर्षोदय राशि में हो उस अवस्था में भाग्योदय
गा ।
(२०) र 'कुण्डली में वर्गोत्तम लग्न, नवांश हो या चन्द्र वर्गोत्तम नवांश में हो उसका
` सारा जन्म शुभ होता है । (२१) जिसके चारों केन्द्र ग्रह रहित नहो हैं उसका सारा जम्म शुभ होता है । इसमें शुभ प्रह होने से विशेष शुभ होता ë ।
(२२) जिसके ग्यारहवें या दशर्वे या लग्न हो के सम्मुख ग्रह हों तो कारक योग होता ë ।
नीच वंश में उत्पन्न भो उच्चपद पाता ë ।