भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

पृष्ठ 138, कुल 418 में से

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पृष्ठ 138

१२२ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

(२) यदि लग्नारूड स्थान से ११ बॅ स्थान को बहुत ग्रह देखें-उससे भी अधिक

घनी हो । राजा के समान हो बिना विघ्न बाधा के सदा धन लाभ हो । जितने

अधिक ग्रहों का योग हो उतना ही अधिक लाभ हो ।

(३) यदि लग्नारूह द्रष्टा ग्रह उच्च का हो-धनवान हो ।

(४) यदि seg द्रष्टा ग्रह पर अगंलाओं का संयोग हो-उससे भी अधिक

घनी हो ।

(५) अगंला शुभ ग्रह का हो-उस से भी अधिक घनी हो ।

(६) यदि ११ वां स्थान अपने शुभ स्वामी से दृष्ट हो उसमें भी यदि लग्न, भाग्य

आदि शुभ स्थान गत शुभ स्वामी से दुष्ट हो तो इस प्रकार के योगों में उत्त￾रोत्तर भाग्य की प्रबलता समझना ।

यदि पद से १२ स्थान में भी ग्रह का योग हो तो उक्त योगों में ग्रहों के

अनुसार फल मे न्यूनता आ जाती है । इस कारण ग्रह का योग या दृष्टि बारहवें

स्थान में न हो तव उपरोक्त उत्तरोत्तर घनवान होने का फल होता है।

लगन पद से १२ वें स्थान का फल

( १ ) शुभ ग्रह या पाप ग्रह से, युक्त या दृष्ट हो-अधिक खचं।

( २ ) पाप ग्रह से युक्त या दृष्ट हो-पाप कमं में खर्च ।

( ३ ) शुभ ग्रह से युवत या दुष्ट हो-शुभ कार्य में खर्च ।

( ४ ) शुभ और पाप क्षेत्रों से युत या दुष्ट-अच्छे और बुरे दोनों कार्य में खर्च ।

( ५) द्वादश में राहु या केतु हो तो-राजा द्वारा खर्च ।

( ६ ) द्वादश स्थान में शुक्र सूयं. या राहु हो-राजाओं के द्वारा धन व्यय ।

( ७ ) द्वादश स्थान में बुध और शुभ ग्रह से दुष्ट हो-गोतियों द्वारा व्यय ।

( ८ ) पाप ग्रह से दृष्ट हो-कलह में व्यय हो ।

( ९ ) द्वादशा स्थान में गुरु और अन्य ग्रह से दुष्ट हो-अपने हाथ से ही धन का व्यय हो।

(१०) द्वाद स्थान में शनि या मंगल या दोनों हों, अन्य ग्रह से दृष्ट हो-कलह में

व्यय हो ।

(११) इ।दश स्थान में चन्द्र की दृष्टि हो-रा जाओं द्वारा व्यय ।

(१२) द्वादश स्थान में बुघ हो-दामाद द्वारा कलह से व्यय । `

(१३) द्वादश स्थान में गुरु हो-अपने हाथ द्वारा व्यय ।

(१४) द्वादश स्थान में मंगल और शनि हो-भाई के द्वारा व्यय ।

लग्न पद से १२ स्थान में जिन ग्रहों द्वारा व्यय होना बताया है उसी प्रकार के

ग्रहों के लाम स्थान में होने से उसी प्रकार घन का लाभ समझना ।

लग्न पद से सप्तम स्थान का फल

पद से सप्तम में राहु या केतु हो-उदर रोगी ।

केतु यदि पाप दृष्ट हो-साहसी, saq केश आदि अवस्था के चिह्न से युक्त ।

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