भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

पृष्ठ 140, कुल 418 में से

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१२४ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

(७ ) तथा जिस भाव का पद लग्न पद से त्रिकोण में पड़े उस भाव की वृद्धि और

त्रिक ( ६-८-१२ ) में पड़े तो उस भाव की हानि समझना ।

(८) लग्न और सप्तम रो पद दोनों परस्पर केन्द्र त्रिकोण या ३-११ में पड़े तो जातक

पृथ्वीपति राजा होता है । -

(९) इसी प्रकार दोनों पदों को देख कर धन आदि भावों के भी फल विचारना ।

लग्नपद और अगला

(१) लग्नपद और उसके सप्तम में अप्रतिबन्ध अगंला पड़े-भाग्यवान हो ।

(२) प्रतिबन्ध रहित अर्गला में शुभ ग्रह या पाप ग्रह हो और वही ग्रह आरूढ लग्न को

देखें-भाग्य को प्रबलता हो ।

(३) प्रतिबन्ध सहित भगला में ग्रह हो तो-भाग्य योग को प्रबलता नहीं होती ।

(४) लग्नपद और उससे राप्तम इन स्थानों में शुभ ग्रह कृत अगला प्रतिबन्धक युक्त भी

हो-धन वृद्धि हो । ;

(५) इससे सिद्ध होता है कि लग्तपद और उस से सप्तम में पाप ग्रह कृत अर्गला हो

तो-सामान्य रूप से घन हो ।

उपपद का फल विचार

(१) उपपद पाप ग्रह की .राशि में हो या पाप युक्त या दृष्ट हो-प्रब्राजक संन्यासी हो

या स्त्री नाश या स्त्री रहित ।

(२) उपपद से शुभ ग्रह का योग या दृष्टि हो-स्त्री पु्रादि का (पूर्ण सुख हो, उक्त

फल नहीं होता ।

(३) उपपद में नीच का ग्रह या नीच नवांश स्थिति या पाप qg हो-स्त्री का नाश ।

(४) उपपद में उच्चस्थ ग्रह हो या उच्च ग्रह की दृष्टि हो-रूप गुणों से युक्त हो, बहुत

पत्नी हों ।

(५) उपपद मिथुन राशि हो-बहुत स्त्री हों ।

( ६ ) उपपद अपने स्वामी से युक्त हो या अपनो दूसरी राशि में हो-वृद्धावस्था में

स्त्री-नाश ।

( ७.) उपपद उच्च में स्थित हो-श्रेष्ठ कुल से स्त्री लाभ ।

( ८ ) उपपद नीच में स्थित हो-नीच कुल से स्त्री ञाभ ।

(९ ) उपपद शुभ ग्रह के षडबगं, योग दृष्टि आदि से सम्बन्ध हो-सुन्दर स्त्री ।

(१०) उपपद और उस का स्वामौ शनि और राहु से युक्त दुष्ट हो-लोक अपवाद से

स्त्री का त्याग या नाश ।

(११) उपपद और उस का स्वामी शुक्र, केतु से युक्त. दुष्ट हो-स्त्री को. रक्त प्रदर ।

(१२) उपपद और उस का स्वामी बुध, केतु से युक्त दुष्ट हो-अस्थिश्वाव रोग युक्त,

मोटी स्त्री प्राप्त हो 1

(१३) उपपद और उसका स्वामी शनि, सूर्य, राहु से युक्त दृष्ट हो-अस्थि ज्वर वाली ।

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