भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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ग्रह कारक : १२५

(१४) उपपद और उसका स्वामी ३ ९ राशि में हो शनि मंगल से राहु युक्त दुष्ट हो- नासिका रोग वाली स्त्री प्राप्त । (१५) उपपद ओर उसका स्वामी १-८ राक्षि में हो शनि मंगल या राहु से युक्‍त दृष्ट हो-नाड़िका निःसरण वाली स्त्री प्राप्त हो (१६) उपपद और उस का स्वामी गुरु राहु से युक्त दृष्ट हो-दन्त रोग वाली स्त्री हो । (१७) उपपद और उस का स्वामी १०-११ राशि में शनि राहु से युक्त दृष्ट हो- लंगड़ी-वात रोग वाली स्त्री प्राप्त हो। (१८) उपपद शुक्र ग्रह रो युक्त दृष्ट हो-पुर्वोक्त अशुभ फल नहीं होता । (१९) उपपद से सप्तम भाव, सप्तम भाव के नवांश और दोनों के स्वामी पर भी विचार कर पूर्वोक्त रीति से फल कहना । : यहां-सूर्य अपने उच्च में स्व राशि में या मित्र गृही हो तो पाप ग्रह नहीं समझना किन्तु नोच य। शत्र, गृह में हो तो पाप ग्रह ही समझना । ( १ ) उपपद से दितीय स्थान में शुभ ग्रह की राशि या sq qz की दृष्टि या योग हो-स्त्री सुख हो । क ( २ ) उपपद से द्वितीय स्थान में मिथुन राशि हो-बहुत पत्नी हों । (३ ) उपपद या द्वितीय में उस का स्वामी हो या अन्यत्र भी उसका स्वामी स्वराशि में हो-तो वृद्धावस्था में उस के सामने ही स्त्री का मरण हो। ( ५) उपपद स्वामी या स्थिर स्त्री कारक ग्रह उच्च में हो-उत्तम कुल से स्त्री लाभ। . नीच में हो-नीच कुल से स्त्रो लाम । i i

(.६ ) उपपद या उससे द्वितीय में शुभ ग्रह का सम्वन्ध हो-उस की स्त्री सौंदये और गुणों से युक्त हो ( ७ ) उपपद या उससे द्वितीय में शनि राहु हो-अपवाद से स्त्री त्याग या स्त्री मरण । ( ८ ) उपपद या उम से द्वितीय में केतु और शुक्र हो-स्त्री को रक्त प्रदर हो ।

(९) उपपद या उस से द्वितीय में बुघ केतु हो-अस्थि थाव ।

(१०) उपपद या उससे द्वितीय में शनि राहु सूयं-अस्थि ज्वर ।

(११) उपपद या उस से द्वितीय में बुध राह-स्थूलांगी 1

(१२) उपपद से द्वितीय स्थान में ३-६ राशि में शनि मंगल हो-नासिका रोग युक्त ।

(१३) उपपद से द्वितीय स्थान में १-८ ),: ,, ल्क जि

(१४) उपपद से द्वितीय स्थान में गुरु शनि हो-कर्ण रोग और नेत्र रोग ।

(१५) यदि उसमें स्तर ग्रह छोड कर भिन्न राशि का मंगल बुध हो या राहु बुध हो-स्त्री

दन्त रोग से युक्त ।

(१६) उपपद या द्वितीय में १०-११ राशि में शनि राहु-स्त्री पंगु, वात रोग पीडित ।

(१७) इन योगों में यदि शुभ ग्रहों का योग या दृष्टि हो-तो अशुभ फल नहीं होता । घ

(१८) इस प्रकार लग्न से, qz से, तथा उपपद से जो सप्तम राशि हो उससे, उसके

स्वामी से, उस वे; नवांश से भी फल निकाजना । š