भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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अध्याय ७

गुलिक आदि विचार

गुलिक का फल भिन्न २ भावों में

१ लग्न में गुलिक-चोर, कूर, विनय रहित, वेद शास्त्र के ज्ञान रंहित, बहुत स्थूल

नहीं होगा, नेत्र दोष युक्त, बहुत बुद्धिमान नहीं होगा, बहुठ सन्तान भी

नहीं होगी । अधिक भोजन करेगा, सुख रहित, लम्पट ओर दुष्ट,

दुराचारी, अधिक आयु न हो, शुरवीर नहीं होगा, मुखे, मंद बुद्धि,

चिडचिडा स्तरभाव, रोगी, पापी, शठ, अति दुःखी ।

२ दूसरे भाव सें-कलह करने चाला, मिष्ट भाषी न हो, अन्न धन रहित, विदेश में रहे,

अपनी बात पर स्थिर न रहे, विवाद में बुद्धि पूर्वक भाग लेने योग्य

नहीं रहे, क्रोधो, विषयातुर, श्रमण झील, व्यथं बकवाद करने वाला ।

पाप युक्त हो तो दरिद्र और मूर्ख हो । निलंज्ज, दुःखी ।

३ तीसरे में-एकान्त प्रिय होने से चमंडो, नशेवाज, और इसी प्रकार के गुण होने में

प्रसिद्ध, विरह, अहंकार आदि दुर्गुण युक्त, विशेष कोप, घन एकत्र करने

में व्यग्र चित्त, शोक भय से रहित, भाई बहनों से रहित, सुन्दर स्वरूप,

सज्जनों का प्रिय, राजमान्य ।

४ चतुर्थ में-विद्या से रहित, घन वाहन, गृह सुल रहित, पारिवार रहित) परदेश वासी,

रोगी, पापी, वात पित्त रोग से पीड़ित ।

५ पञ्चम-अति चंचळ, शील रहित, पाप बुद्धि, अल्पपुत्र, अल्पआयु, निन्दक, निर्धन,

अल्प बुद्धि, gs, नास्तिक, बोयं होन, स्त्री के वश ।

६ षष्ठ-बहुत शत्रुओं को मारने वाला, भूत विद्या में विनोदो, पराक्रमो, अच्छे पुत्र

वाला, पुष्ट देह, उत्साही, लोक हित कारक, स्त्री का प्रिय, शत्रु होन ।

७ सप्तम-कलह करने वाला, दुष्टा स्त्री वाला, कई स्त्रियों का पति, स्त्री के वश, सर्व

जनों का विरोधी, कृतघ्न, मंद बुद्धि, अल्प ज्ञान, दुर्बल देह, अल्प क्रोधी ।

मैत्री हीन, महापापी, स्त्री के घन से जीने वाला ।

च अष्टस-कुरूप मुख, विक नेत्र, हस्त्रदेह ( ठिंगना ), दुःखी, क्रूर, कठिन रोग,

निर्धन, निर्दय, तिगुंण, क्षुधा से पीड़ित ।

q नवम-गुरुजनों तया पितरों को मारने वाला या उनसे त्यक्त, पुत्रों से त्यक्त, नीच

कर्म कर्ता, कुकर्मी, निर्दय, चुगलखोर, बहुत कष्ट, पानी सा ठंडा ।

१० दशस-सैकडों अशुभ कर्म युक्त, घामिक और अच्छा काम त्यागे, निज कुल के हित￾कारी आचरण से रहित । बिना मान वाला । दूसरों को कोई चीज देने का

मन न करे । पुत्रवान, सुखी, मोगी, देव मदत योगी !

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