सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 148, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ें१३२ : ज्योतिष-शिक्षा, तुतोय फलित खण्ड
११ लाभ-बहुत सुखी, धनी, तेजस्वी, सुन्दर सन्तान युक्त, बुद्धिमान, शवितवान, ज्येष्ठ
भाई को मारने वाला, पूज्य, योगी, नेता, बंधु उपकारी, छोटा कद 1
१२ व्यय-विषय-वासना से रहित, दोन बचन में प्रवीण, सब का धन हरे, खर्च अधिक,
गरीब, आलसी, पापी, भाग्य होन, अंग होन, गुणी होकर भी नीच कर्मी ।
गुलिकेश विचार
झ्ुभ- गुलिक के ग्रह का स्वामी बल युक्त हो तो अच्छा फल होता है वह वर
युवत हो और केन्द्र या त्रिकोण में हो या स्वगृही, स्वउच्च या मित्र गृही
हो तो-उसके पास हाथी घोड़े आदि वाहन हों, वह कामदेव तुल्य सुन्दर हो,
बहुत माननीय हो, अति प्रसिद्ध हो और पृथ्वीपति हो 1
अनिष्ट- गुलिक से त्रिकोण गत लग्न में जो ग्रह हो उसके द्वादशांश या नवांश में
जो ग्रह हो, गुलिक से युवत, गुलिक स्थित राशि का स्वामी ये सब अनिष्ट
करने वाले होते हैं ।
) गुलिक का फल भिन्न ग्रहों के साथ
) गुलिक सूर्य युकत-अपने पिता का विरोधी या पिता को मारे या क्लेश देवे ।
रर चन्द्र “ -माता को क्लेश देवे ।
२१ मंगल ” -भाइयो से रहित, या भाइयों को खोवे ।
” बुघ ” -उन्मादी हो ।
११ गुरु ” -पाखंडी हो, दूसरों का दूषक हो 1
० शुक्र ”-नीच पुरुष, नीच स्त्री का स्वामी, स्त्री जनित रोग से निहत ।
शनि ”-कुष्ट व्याधि युक्त, अल्पायु, सोख्य से युक्त ।
” राहु "विष देने वाला, विषैले रोग से रोगी ।
” केतु ”-गृहादि जलाने वाला या अग्नि से पीडित ।
विष नाडी से युक्त गृह में गुलिक-राजा भी हो तो निश्चय भिखारी हो ।
जन्म में उपग्रह से युक्त गुलिक-अनिष्ट फल दायक ।
यम कंटक के साथ गुलिक-अच्छे फळ की आशा रहती है।
गुलिक बुरा फल देने में बहुत शक्तिमान है यह फल देने में शनि के समान है ।
गुलिक मृत्यु लाता है।
प्राणपद फल
१ लग्न में-दुबल रोगी, ग् गा, पागल, मूर्ख, अंग हीन, दुःखी, कृश ।
२ घन सँ बहुत घन घान्य नौकर तथा प्रजा से युक्त, सुन्दर सोभाग्यवान ।
३ सहज हिसक, गौरव वाला, निठुर, मलिन, गुरुओं का अभक्त ।
` ४ चतुथ-सुली, सुन्दर, मित्रों और स्त्रियों का प्रिय, गुरु भक्त, मुदु, सत्य वक्ता ।
५ पञ्चम-सुखी, सुकर्मी, दयालु, सव कार्यो में निपुण। _