भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

पृष्ठ 149, कुल 418 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 149

१ |

„ गुलिक आदि विचार : १३३

६ षष्ठ - बंधु क और शत्रु के वश में रहनेने वाला, मंदाग्नि रोगीगी, अल्पायु, दया होन,

७ सप्तम-ईर्ष्यावान, कामी, कठोर, भयंकर रूप, सब से अप्रसन्न, sq fg ।

ड अष्टभ-रोगो, राजा, नौकर, बंधु ओर पुत्रों से सदा दु:खी ।

९ नवम ना, घनी, भाग्यवान, सुन्दर रूप, नौकरी करने वाला, सरल हृदय और पंडित ।

१० वशस-बलो, बुद्धिमान, राज कार्य में चतुर, पंडित, देव भक्त ।

११ लाभ-विख्यात, गुणी, पंडित, भोगी, गौर वणं, माता का प्रिय ।

१२ व्यय-क्षुद्र, दुष्ट, अंग होन, बंधुओं का द्वेषी, नेत्र रोगी, काना ।

प्राणपद गुलिक आदि निकालना ।

प्राणपद

३ घड़ी-१२ राशि | १५ पल- ३० अंश | इन प्रकार इष्ट काल की घटा-

१ घड़ी- ४ राशि | १ पल २ अंश | पल का राशि अंश आदि बना लेना ।

१९पल- १ राशि| १ विपल- २ कला। वह मध्यम प्राणपद हागी ।

राशि १२ से अधिक हो तो १२ से भाग देने से जो बचे उप लेना ।

फिर निरयन सूर्य स्पष्ट लेना, देखना यह चर स्थिर आदि किस राशि में है यदि

सूर्य स्पष्ट चर राशि में हो सूर्य स्पष्ट में मध्यम प्राणपद जोड़ देने से षष्ट प्राणपद

हो जायगा ।

यदि सूर्य स्पष्ट चर न हो तो उस से पञ्चम या नवम भाव में जो राणि हो उन

में देखना कौन चर राशि है वही चर राशि का अंक लेना और सूर्य स्पष्ट में राशि के

स्थान में प्राप्त चर राशि लेकर शेष अंश पूर्ववत रहेंगे । इसमें मध्यम प्राणपद जोड़ने

से स्पष्ट प्रणपद हो जायगा ।

उवाहरण

घ. प. वि. रा०

इष्ट १५-५१-४२ का प्राणपद निकालना है । सूयं स्पष्ट ११-५-४००४५ हैं ।

रा. ०

१५ घड़ी=१५ > ४-६० राशि=०-०-०=०

५१ पल=५१ X २=१०२ अंश=३-१२-:-०

४२ वि.=४२ > २८४ कर्ा=०-१-२४

š वि.= % २=१ कला-=०-०-१

मध्यम प्राण पद योग्=२¬१ ३-२५ `

सूर्य मीन का द्वि स्वमाब है यदि चर राशि का सूर्य होता तो इसी में मध्यम प्राणपद

जोड़ना पड़ता 1 यहाँ दिस्वमाव राशि होने से इसके पंचम और नवम को राशि खोजा 1

पंचम में कर्क चर राशि है। नवम में वृश्चिक स्थिर राशि है। तो चर राशि कर्क