सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें१३६ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
अप्रकाश ग्रह उपग्रह ५ हें उदाहरण--- १ घूम-सूर् स्पष्ट + ४ रा. -१३०-२०' रा.
२ पात .(व्यतीपात)=(१२ राशि-धूम) सूर्य स्पष्ट=११-५९_४०'-४५" ३ परिषि=(पात + ६ राशि) + ४-१३-२०
Rf इन्द्रचाप=(१ २ राशि-परिघि) १ घ्म = ३-१ ९..०-४५ ५ घनु या शिखि या केतु=(इन्द्र चाप + १२-००-०१०५
१६९०-४० र =शिखि कित + १ राशि —धूम ३-१९- ०-४५
` q डर ) २ पात =८-१०-५९-१५
+< ३ परिघि =२-१०-५९-१५
१२-००-००"
= परिधि २-१०-५९-१५
४ इन्द्रचाप =९-१९- ०-३५
- १६-४०
५ शिखि =१०¬ ५-४०-४५
+१
सूर्य स्पष्ट २१३५-४०-४५
ये ५ अदृश्य उपग्रह Š
ये घुम आदि उपग्रह आकाश में विना दिखे विचरते है । यदि किसी समयये कहीं दिखाई देते हैं तो संसार में घोर उपद्रव होने की छाया डालते हुँ ।
अदृष्य उपग्रह की पहिचान ( अन्यमत से )
(१) घूम- आकार घुम्न पट के समान है । कोई कहते Ç यह पुछलूतारा है ।
(र) व्यतिपाव--कोई इसे तारा टूट कर गिरने को कहते हैं ।
(३) परिषि सूर्यं का चन्द्र के आसपास गोल चक्कर होता है ।
(४) इन्द्रचाप--या इन्द्रघनुष या कोदण्ड--प्रसिद्ध इन्द्रधनुष है, जो वर्षा में दिखता ë ।,
(५) केतु- यह घूमकेतु ë । संसार में बहुत उपद्रव करता है ।
धूम आदि अप्रकाश ग्रह के फल पर विचार
इन अप्रकाश ग्रहों से आव के फळ का भी विचार होता Š । सूर्य आदि प्रकाश ग्रहों के भाव फळ विचारते समय अप्रकाश ग्रहों के भाव फळपर सी विचार कर फल का निर्णय करना चाहिये । यदि सूर्यादि ग्रहों के माव फळ शुम हों ओर अभ्रकाश ग्रहों के भी भाव फल शुम हों तो अति qa फल होता हे । यदि दोनों का फळ sqa हो तो अति अशुभ फल होता है । एक शुभ दुसरा अशुम हो तो मध्यम फळ होता है ।