भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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गुलिक आदि विचार : १३७

अप्रकाश ग्रहों का पृथक्‌ भाव अनुसार फल

१ धूम फल

(१) लग्न में-योद्धा, निबंल दृष्टि, स्तब्ध, निर्दय, क्रूर, अति क्रोधी । | (२) द्वितीय मॅ-रोगी, धनी, अंगहीन, मन्द बुद्धि, कार्यहीन, राज्य से हृत मन वाला । (३) सहज में-बुद्धिमान्‌, शूरवीर, उदार, प्रियवक्ता, परिजन और घन से युक्त । (४) चतुथं मॅ-स्त्री से त्यक्त होने से सदा दुःखी, सब शास्त्रों का ज्ञाता । (५) पंचम में-अल्प सन्तान, धन हीन, गौरवी, सवंभक्षो, मित्रों के विचार से विमुख रहे ।

(६) षष्ठ में-चली शत्रु को जीतने वाला, तेजस्वी, विख्यात, और रोगहीन । (७) सप्तम में-निघंन, कामी, परस्त्री गामी, पंडित किन्तु प्रतिभाहीन | (८) अष्टम में-प शक्रम रहित भी उत्साहो, सत्यप्रतिज्ञ; अप्रिय वक्ता, निदुर, स्वार्थी । (९) नवम-पुत्रवान्‌, माग्यवान्‌, घनी मानी, दयालु, धर्मात्मा, भाइयों का पोषक । (१०) दशम-पुत्र, सौभाग्य, संतोष, सुबुद्धि से युक्त, सुखी और सत्य प्रतिज्ञ (११) लाभ-धन धान्य, सुवणं युक्त, विनीत, संगीतज्ञ, सुन्दर कला को जानने

वाला ।

(१२) व्यय-पतित, पापो, पर-स्त्रो गामी, व्यसनी, निदंय, शठ ।

२ पात फल

(१) लग्न में-दुःखी, क्रूर, हिंसक, मूर्ख बन्धुओं का द्वेषी ।

(२) घन में-कुटिल, पित्त प्रकृति, भोगी, निदंय, कृतघ्न, दुष्ट, पापी ।

(३) सहज-स्थिर बुद्धि, योद्धा, दाता, घनी, राजमान्य, सेनापति ।

(४) चतुथे-बंघन व रोग से पीड़ित, सन्तान और सौभाग्य से हीन ।

(५) पंचम-घन होन, रूपवान्‌, कफ पित्त वायु से पीडित, निठुर, निलज्ज ।

(६) षष्ठ-शत्रु को जीते, पृष्ट देह, शांत चित्त, सब अस्त्र ओर कला में निपुण ।

(७) सप्तम-धन ओर स्त्रो से रहित या स्त्री के वश, दुःखी, निळंज्ज, कामी,

छत्रुओं को सुखदायक ।

(८) सष्टम-नेत्र रोगी, कुरूप, भाग्यहीन, ब्राह्मणों का निन्दक, रक्त पीड़ा से

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(९) sea व्यापार करने वाळा, बहुत मित्र, स्त्री का प्रिय, प्रियवक्ता,

अनेक विषयों का ज्ञाता ।

(१०) दश्चम-सम्पत्तिवान्‌, घमंज, घकारो, महा बुद्धिमान्‌, पंडित ।

(११) छाम-अत्यन्त घनी, मानी, सत्यवक्ता, दृढ़ भ्रतिज्ञ, संगीत जानने वाळा, घोड़े

को सवारी करने बाळा । š

(१२) व्यय-क्रोषी, अंग हीन, घर्म निंदक, बन्धुं का द्वेषो, बहुत कार्य करने वाला ।