भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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गुलिक आदि विचार : १३९

५ केतु (शिखि) फल

( १) लग्न में-सब विद्या में निपुण, सुखी, बोलने में चतुर, लोगों का प्रिय, सब

काम में पूर्ण ।

(२) घन में-ववठा, मधुरभाषी, सुन्दर, कवि, पंडित, मानी, विनीत, वाहन￾सुख युक्त । ( ३ ) सहज में-कंजूस, कुकर्मी, कृश देह, कठिन रोग से युक्त ।

(४) चतुथं-सुन्दर, गुणी, सात्विक, वेदज्ञाता, सदा सुखी ।

( ५) पंचम-सुखी, योगी, कलाओ का ज्ञाता, युक्ति जाननेवाला, बुद्धिमान्‌ वक्ता

गुरु भवत ।

(६ ) षष्ठ-मातृ कुल नाशक, शत्रुओं को जीतने वाला, बहुत बन्यु, श्रवीर, सुन्दर,

चतुर ।

( ७) सप्तम-जुभारी, कामी, भोगी, वेश्या में रत ।

( ८) अष्टम-ऊुकर्मी, पापी, निर्लज्ज, पर निंदक, स्त्री सुख हीन ।

( ९ ) नवम-वैष्णव आदि भेष धारी, प्रसन्न चित्त, सब जन्तुओं का हित साधक, घम

काये में निपुण ।

(१०) दशम-सुख सौभाग्य युक्त, स्त्रियों का प्रिय, दानी, ब्राह्मणों से संगति ।

(११) लाभ-वित्तलाभ करने वाला, धर्मात्मा, घनी, सुन्दर, शूर, सुकर्मी, महा पंडित 1

(१२) व्यय-पापी, श्र, श्रद्धा और दया से रहित, पर स्त्री गामी, क्रूर ।

सूर्य आदि ग्रहों के उपग्रहों का दिन के अनुसार

कालादि ज्ञान चक्र

दिन का कालादि चक्र

39 3 MSS MT l

दिन १ =

खंड २ खंड ३खंड ४ खंड ५ खंड ६ खंड ७ खंड ८ खंड

रविवार काल परिधि घुम अढयाम यमघंट कोदंड गुछिक निरींश

सोमवार परिषि धूम अद्धंयाम यमघंट कोदंड गुरिक काल

मंगलवार घूम adam यमघंट कोदंड गुलिक काल परिधि »

बुधवार sam यमघंट कोदंड गुर्छिक काल परिधि धुम

गुरुवार यमघंट कोदंड गुलिक कार परिधि घुम अर्घयाम ,,

शुक्रवार कोदंड गुलिक काल परिधि घूम गर्ढयाम यमर्घं ,,

शनिवार गुलिक काल परिधि धूम अद्धंयाम यमघंट कोदंड „

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