भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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(१४० : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

रात्रि का कालादि ज्ञान चक्र

रात्रि १ खंड २ खंड ३ खंड ४ खंड ५ खंड ६ खंड ७ खंड ८ खंड

रविवार यमघंट कोदंड गुलिक काल परिधि धूम अद्धंयाम ।नरीश

सोमवार कोदंड गुलिक काल परिधि धम अडढ्याम यमघंट

मंगलवार गुलिक काल परिधि धूम अढद्धयाम यमघंट कोदंड i

बुधवार काल परिधि घुम . अद्धंयाम यमघंट कोदंड . गुलिक

गुरवार परिधि धुम बअरद्धयाम यमघंट कोदंड गुरिक कार

शुक्रवार धूम अद्धंयाम यमघंट कोदंड गुलिक काल परिधि ,,

शनिवार arar यमघंट कोदंड गुलिक काल परिधि घुम

दिन रात में उपरोक्त ७ उपग्रहों के प्रत्येक के खण्ड बताये ë । आठवां खंड=निरीश

अर्थात्‌ बिना स्वामी के होता है । अर्थात्‌ केवल ५ ही खंडों में उपरोक्त ग्रह स्वामी

होते हे जिनको नानर चाहिये कि किस समय कौन उपग्रह स्वामी ë 1

रीतिः—दिन का जानने को ( दिनमान = ८ ) %,खंड संझ्याञउस उपग्रह का

समय । रात्रि में इष्ट हो तो ( रात्रिमान + ८ ) x खंड संख्या + दिनमान=समय ।

उदाहरणः--मान छो इतवार के दिन को गुलिक खंड कब जायेगा यह जानना है,

इतवार को दिनमान २८-३० है । २८ घ. ३० प. Z= घ. २३ प. ४५ वि. का

एक खंड हुआ । इतवार को .गुलिक खंड ७वां है । १ खंड २-२३-४५ X ७=९

५६ प. १५ वि. इष्ट तक इतवार के दिन को गुझिक खण्ड रहेगा ।

मान छो इतवार कीं रात्रि को काल खण्ड जानना है । काल खण्ड चौथा है इतबार

का दिनम्ान २८-३०=६०-( २८-३० )=रात्रिमान ३१-३० :- ८८१ खंड=३-५६-१५

का हुआ । ३-५६-१५ X ४ खंड=१ ५-४९ रात्रि + दिनमान २८-३०४४-१५ इष्ट

तक कार खंड रहेगा ।

फल विचार

उपग्रह ९ माने जाते ë (६) गुलिक (मांदि), (२) यमकंटक, (३) अड याम, (४)

काळ, (५) घूम, (६) पात (व्यतीपात), (७) परिधि (परिवेश), (८) कोदंड (इन्द्रधनुष); (९) केतु (घूमकेतु या शिखी) ।

१ गुिक--गुरिक काल सदा त्याज्य है । राजा को भी भिखारी बनाता है । बुरा

फल देता हे । गुछिक फल देने में शनि के समान है । गुलिका मृत्यु लाती हैं ।

२ यमघंट (यमकंटक)--गुरु के समान फल देता है । यमकण्टक के साथ गुलिका

हो तो अच्छे फल की आशा की जाती है । यह यमकंटक अच्छा फल देने में शक्तिशालो ë ।

३ अद्धयाम--बुघ के समान फल है । शुभ घर में अच्छा फल देता है; बुरे घर में

जा बरा फर देता है ।