सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 157, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ेंw =” sss m [ T
ग्रहो का रश्मि फल विचार : १४१
४ काल--राहु के समान फल देता है ।
५ घूम--जहाँ धूम हो वहाँ सदा गर्मी से त्रास अग्नि भय और मानसिक त्रास
होता है । यदि.लग्न या अन्य भाव अपने स्वामी से युक्त धूम के साथ हो या अद्धयाम
के साथ हो तो उस भाव का नाश होता ë ।
६ व्यतीपात--सींगवाले जानवर या चौपायो से भय मृत्यु ।
७ परिधि--जब परिवेश या परिधि हो तो जल का भय हो, जल के रोग से
बंधन भी सम्भव है ।
८ कोदंड--पत्थर से या शस्त्र से चोट लगे और गिर भी पड़े ।
९ केतु-गिरने से चोट, व्यापार में हानि से कष्ट, बिजली गिरने का भय ।
ये फळ उस ग्रह को दशा में होंगे जो उस घर में है जहाँ ये उपग्रह Š ।
उपग्रहों का लग्न आदि भाव का फल
१ लग्न में--अल्प जीवन ।
२ द्वितीय में--कुरूप चेहरा।
३ तृतीय में--साहस 1
४ चतुर्थ में--दुःख ।
५ पञ्चम में--सन्तानहीन।
६ षष्ठ में--शत्रु द्वारा मानसिक त्रास ।
५ सप्तम में--ओज शक्ति का ह्वास।
८ अष्टम में--दुर्मार्ग से मृत्यु ।
९ नवम में--धर्म आदि की प्रतिकूलता ।
१० दशम में--सदा भटकते रहने का झुकाव ।
११ लाभ में--लाभ ।
१२ व्यय में--नित्य दोष करना ।
७
अध्याय ८
ग्रहों का रश्मि फल विचार
रदिम अर्थात् ग्रह की किरण जो गणित द्वारा प्राप्त हो । 2
जिस ग्रह की बहुत रश्मि हो वही ग्रह स्थान पर स्थावर माल का %% देता ë!
अधिक रश्मि हो तो बडा राज्य प्राप्त हो, बल में श्रेष्ठ हो तो युद्ध में जय
प्राप्त हो ।
यदि ५ रदिम है तो दुःख देता है, दरिद्री हो, नीच की संगति करे । वह ग्रह नीच
का हो तो कैद कराता है 1 जितनी रश्मि अधिक हो उतना अच्छा फल होगा 1