सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें१४२ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
आगे ग्रहों को रश्मि का फल दिया है
१ से ४ तक रब्मि--बहुत दुःख पावे, कुल से होन, पतित, दुष्ट, दरिद्री, नीच
कुल से स्नेह करने वाला, उत्तम कुल में भी पैदा हो तो नोच को चाकरी करे, दारिद्रय
से दुःखी रहे ।
५ से १० तक रह्िम--प्राणियों में अतिहीन, परदेश जाने में मन रखने वाला, भाग्य
से हीन, सदा मलिन, क्लेश युक्त, ऐश्वर्य हीन, निरन्तर दूसरों के पालन करने ने
दुःखी, निधन, भारवाहक, स्त्री-पुत्रादि से हीन, ऐसा कर्म करे जिससे वंश कुल की
हानि हो ।
१० से १५ तक--प्रधान तथा पूजनीय जनों में भक्ति रखने वाला, उत्तम सुख
भोगने वाला, अपने कुल के अनुकूल, अल्प धन, घर्म युक्त सुन्दर वेष ।
११ रदिम--अल्प पुत्रवान्, स्वल्प धन, स्वल्प कुटुम्ब का भी पालन कष्टमय हो ।
१२ रश्मि--स्वल्पघन, मूर्ख, धूर्त, सत्यहीन निर्धन ।
१३ रश्मि--चोर, निर्धन ।
१४ रहिम-घनी, कुटुम्व पालक, विद्वान, कुलोचित कार्यकर्ता, धर्मी, क्रोध रहित,
द्रव्य उपाजंन करने में तत्पर ।
१५ रङ्मि--वंश से सुख हो, घनी हो, सव विद्या, गुण और धन से युक्त, कुल में
श्रेष्ठ ।
१५ से २० रश्मि--कुल श्रेष्ठ, घनी, सदा स्वजनों से युक्त, अल्पशील, धीर,
उत्तम कीति, उत्तम कलाओं में चतुर, अच्छा स्वभाव, थोड़ा द्रव्य, हो, धमं करे, सम्बन्थियों से पूर्ण, बहुत सेवक, बहुत कुटुम्ब ।
१६ रदिम--कुल श्रेष्ठ ।
१७ रदिम--बहुत नौकरों वाला 1
१८ रक्ष्म--बहुत कुटुम्ब वाला ।
१९ रश्मि--बिख्याठ कीति ।
२० रस्मि--स्वजनों से परिपूर्ण ।
२० से २५ रह्मि-सवंत्र पूज्य सौंदयं युक्त, धैयंवान्, विद्वान्, वीर, सब काम
करने में चतुर, भाग्यवान्, पंडित, शीऊवान्, धन सुख, मित्रों को सुख देनेवाला, राजा
से मान, सम्पत्ति थोड़ी हो ।
२१ रश्मि--पचास मनुष्यों का पालक, दानशील, दयावंत ।
२२ रश्मि--लोभी, घनवात्, शत्र हीन, समर्थ, अल्पगुणो, दयाळू, दान शील 1
२३ रव्मि--विद्याहीन हो तब भी सब जगह प्रधानता हो, धनवान्, सुखी,
सुशील ।
२४ से ३० रश्मि--लक्ष्मीवान्, बलवान्, राजप्रिय, प्रतापी, घनवान्, बहुत जनों
से युक्त, तेजस्वी, राजा से धन और सुख प्राप्त, राजमन्त्री, मनुष्यों में पुज्य सेनापति ।