भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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ग्रहों का रश्मि फल विचार : १४३

३० से अधिक रदिम--कारबारा, मुख्य मालिक हो, गाँव खेती आदि हो ।

३१ रदिम--अति विख्यात, पृथ्वी का भोगनेवाला, चतुर, राजा के तुल्य, सेनापति

प्रधान पद ।

३२ रहिम--५०० ग्रामों का अधिपति, अनेक ग्राम पर्वतों का स्वामी, अनेक नगरों

का बसाने वाला या १०० ग्रामों का अधिपति ।

३३ रदिम--१००० से अधिक ग्रामों का अधिपति ।

३३-३४--रदिम--हजार ग्रामों का स्वामी या कोई ३००० का स्वामी ।

३४ रश्मि--३००० से अधिक ग्रामों का अधिपति ।

३२ से ३५ रश्मि-५०० से १००० मनुष्यों का पोषक ।

३५ रश्मि-अनेक कोषों से सम्पन्न, बड़ा पराक्रमी, लोगों में विख्यात यश, सौंदर्य

युक्त) मंडल का स्वामी, विजय युक्‍त, निमंल शोल, विलास युक्त 1

३६ रदिम--एक लाख गाँवों का नियंत्रण करने वाला, डेढ़ लाख ग्रामों का स्वामी,

या २५ गाँव का अधिपति ।

३६-३७ रदिम--१॥ लाख गाँवों का अधिपति बड़ा प्रतापी, शत्रुहंता ।

३७ रहिम--३ लाख गाँवों का स्वामी या अन्य मत से २६ गाँव का अधिपति ।

३१ से ४० रदहिम--क्रम से १०० से १००० मनुष्यों का पोषक समान ।

३८ रदिम--७ लाख गाँवों का स्वामी अन्य मत से ४ लाख गाँवों का - स्वामी या

२७ गाँव का अधिपति, बड़ा पराक्रमी, इन्द्र के समान सम्पत्ति वाला ।

३९ रश्मि--सम्पूर्ण जनों को सन्तुष्ट करने वाला, पृथ्वी का पति, बड़ा प्रतापी

राजा, तेजस्वी, विख्यात कीति, कठिन घर्मेवाला, शत्रू, नाशक, ३० ग्राम का अधिपति ।

४० रद्दिम--बड़ा प्रतापी राजा, सेवा, वाहन से परिपूर्ण, विजय यात्रा हो । ३६

गाँव का अधिपति, राजाओं को जीतने वाला । अन्यमत से १०० गाँव हों। |

४१ रब्मि--सूर्य तुल्य तेजस्वी, समुद्र-मण्डला भूमि का पालनकर्ता, समुद्र पर्यन्त

विख्यात कीति, राजा निश्‍चय होता है । एक देश का राज्य करे 1

४२ रव्मि-दो समुद्रों तक की पृथ्वी का राजा, दो देशों का राज्य करे 1

४२-४३ रदिम--शत्रु हंता, अतुल वीर्य, चारों समुद्र तक पृथ्वी का पालन कर्ता

बड़ा यश ।

४३ रङ्मि--तीन समुद्र तक पृथ्वी का राजा या रे देश का राज करे ।

४४ रहिम -चक्रवर्ती राजा, अति सोख्य, देव ब्राह्मण का भक्त दीर्घायु, सेना,

बाहन, आदि युक्त सम्राट्‌ अन्यमत से ४ देशों का राज्य करे । ;

४५ रश्मि--द्वीपान्तरों में पालन कर्ता, सब में पुज्य, महाबली, सौभाग्य सस्पन्त

बडा प्रतापी । ५ देशों का राज्य करे, । š

४५ रदिम के ऊपर--द्वोपान्तरों में उसका यश गाया जावे, देवताओं से मी अजेय | |