सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 160, कुल 418 में से
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१४४ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
४६ रदिमि-सार्वेभौम राजा हो, सब नृपों पर उसकी आज्ञा चले, ६ देशका
सज्य करे ।
४७ रश्मि--समस्त भूलोक के भार को सहने वाळा, शत्रुहंता, इन्द्र के तुल्य, सब
छोकों में यश, चक्रवर्ती, ७ देशों का राज्य करे ।
४७ से ५० तक रश्मि--राजा हो ।
४८ से ५० तक रष्मि-सार्वभौम राजा हो !
५० से ऊपर रङ्मि- इन्द्र तुल्य हो, भूप कुलात्मक चक्रवर्ती राजा होता है, वैश्य
कुलोत्पन्न राजा होता हैं, शुद्र कुलोत्पन्न घनवान्, विप्र कुलोत्पन्न विद्वान्, यज्ञ आदि कर्म
करने वाला हो ।
५१ रिम के ऊपर--चक्रवर्ती राजा (सम्राट) होता ë ।
रदिमि (किरण) रहित ग्रह--होने से उसी प्रकार विपरीत फल होता है। जिस
समय ग्रहों की अन्तिम अवस्था हो तो किरणों का क्षय ओर प्रथम अवस्थाएं हो तो
किरणों की वृद्धि होती हे ।
विशेष विचार-उच्चाभिमुख. ( नीच से उच्च को भोर जाने वाला ) ग्रहों के
किरण अनुसार पूर्ण फल होता है । |
नीचाभिमुख ( उच्च से नीच की ओर जानेवाला ) ग्रहों की किरण अनुसार फल से
न्यून फल होता है ।
सब ग्रहों का शुभ या अशुभ फल रश्मि संख्या के अनुसार ही होता है । बिना रिम
ज्ञान से वास्तविक फल समझ में नहीं आता । इसलिए रश्मि ज्ञान करने के उपरान्त फळ
का विचार करें ।
रहिम से संतान विचार
३३ ररिम = १० संतान ४२ रदिमि 5२१ संतान
WoT ERR ४३ =२४
३५ 3 =१५ ” xx ” =२५ शा
३६” १६ ” ४५ ” =३० ?
३७” २१६ ” ` ४६ ” >३२ 7
३८” = 7? ४७ ” =५० ” ३९” =१८ " ४८ 5 00.2 ¥o १7. =t¿ 3 ” =१०० 31
RO इससे अधिक रश्मि=इससे अधिक संतान
हो ऐसा ( वृ. पारा. का ) मत है ।