भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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ग्रहों का रश्मि फल विचार : १४५

उच्च रदिम का फल _

सप्त बल से जो अधिक बलवान्‌ हो उपे उच्च रश्मि का फल ।

(१) स्थान बल में अधिक हो = देश में मुख्य हो । |

(२) दिग त क्र = विजयी

(३) चेष्टा ,, न = प्रभुताई

(४)काल ,, » = सवं काल में कुशल ।

(५) अयन बल 1 = सवं काल आनन्द ।

(६) उच्च बल > = वंश में मुख्य ।

(७) नैसगिक बल = =स्वजाति घमं का विशेष प्रतिपादन ।

रश्मि का विशेष फल

(१) पशु पालन संख्या-उच्च <fšq और चेष्टा का योग कर उसका आधा करे इसे

पुर्व प्राप्त योग में गुणा कर ६० का भाग देना जो लब्धि आये वह संख्या, नर, अश्व,

गज, गौ आदिं पोष्य वर्ग जानने, अर्थात्‌ इतने जीवों का वह पालन करेगा ।

(२) राजयोग में रश्मि का विचार--पहिके रदिमयोग का फल कहा है 1 आगे राज￾योग का फल भी बताया गया है । परन्तु राजयोग में रदिमियोग के फल का भी विचार

करना तब ही उस का यथार्थ फल प्रगट होगा ।

(३) भाव फल में रश्मि विचार--आगे जो भाव फल बताये गये Q उन का शुभा-

शुभ विचारने में रदिम का भी फल विचारना । रश्मि फल के अनुपात से शुभाशुभ फल

अधिक या अल्प होगा । रहिम फल को जोड़ या घटा कर निर्माण करना ।

(४) राजयोग में ररि का और विचार--जो आगे राजयोग के फळ वताये हँ

ब्राह्मण के हों और उत्तम रश्मि योग हो तो वह यज्ञ कर्मादि निष्ठ हो जिसके पुष्य प्रताप

से स्वर्ग प्राप्त करे ।

रदिम साधन

पिछले गणित खंड में उच्च रहमि और चेष्टा रदिम साधन करना बताया है यहां

रश्मि साधन में कुछ भिन्नता है । वृहत्पाराशरी में इस प्रकार रश्मि साधन करना

बताया है-

( ग्रह स्पष्ट-ग्रह नीच ) शेष ६ से अधिक हो तो षड़भाल्प करने को १२ राशि से

घटा कर जो शेष बचे वह लेना ।

इस से शेप में उम ग्रह के श्रुवांक से गुणा कर ६ का भाग देने से लब्धि रहिम प्राप्त

होती है । ग्रहों के ध्रूवांक ये हैँ

ग्रह सूर्य चन्द्र मङ्गल | बुध | गुरु | शुक्र | दानि

ह| १० | ९ ५ ५ | ५ ८ | ५

यहां बताये ध्रुवांक से परमोच्च की ददिम प्राप्त होती है । मध्य की रदिम अनुपात

से निकाल लेना ।

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