भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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७७ - क

फल का स्थूल विचार : १५३

: २७--ऐसे २ स्थान वाले ग्रह की दशा में उसके दोनों भावों का फल होगा पूर्वा

में दशाकाल में जो क्रम से आता हैं उसका फल रहेगा । इसमें विषम घर में उस ग्रह का

फल पहिले अनुभव होगा 1 सम राशि का बाद में ।

२८--भावेश अपने घर में हो या स्वस्थान पर उसकी दृष्टि हो या उसका स्वस्थान

शुभयुक्त या दृष्ट हो तो उस भाव की वृद्धि करता है । अर्थात्‌ भावेश युक्‍त या दुष्ट या

शुभयुवत या दुष्ट भाव की वृद्धि होती है।

२९--भावेश स्वस्थानी, उच्च या मूलत्रिकोण का हो तो अच्छा फल देते हैँ अन्यथा

शुभ फल नहीं देते

३०--कोई भाव अपने भावेश से युवत या दुष्ट न हो तो मध्यम फल देते हैँ ।

३१--पाप ग्रह और भावेश के शत्रु से युक्त या दृष्ट ग्रह अनिष्ट फल देता है ।

३२--शुभ भाव के स्वामीयुक्त या दृष्टमाव जो पापयुक्त न हो, शुभ फल

देते हैं ।

३३--पापयुक्त, पाप भाव के स्वामीयुक्त, या पापदृष्ट, नीचगत, अस्तंगत, हीनबल

ग्रह अशुभ फल देते हैं ।

३४--पापयुबत या दृष्ट भाव की हानि होती है । परन्तु ६-८-१२ भाव में विप￾रीत फल होता हैं ।

३५--भावेश शत्रु गही या नीचराशि में हो, शुभयुबत या दृष्ट न हो तो उस भाव

का नाश होता है ।

३६--भावेश अष्टम में हो या अस्त, नीच या शत्रु गृही हो, कोई शुभयुक्‍त या

दृष्ट न हो तो उस भाव की हानि होती है । इसमें उस भाव से उस भाव का स्वामी

अष्टम हो या लग्न से अष्टम हो, दोनों प्रकार से विचारना । ,

३७--यदि शुभ ग्रह भी सिवाय भावेश के उपरोषत प्रकार से भाव में हो तो भाव￾फल अच्छा नहीं देता । यदि पापग्रह उपरोवत प्रकार से हो तो उस भाव का फल पूर्ण

नाश हो ।

३८--किसी भाव का स्वामी जिप राशि में है उस राशि का स्वामी दुष्ट स्थान

में हो तो वह भाव दुर्बल हो जाता है ।

३९--भावेश्‌ को छोड़कर अन्य ग्रह कुछ शुभ, कुछ अशुभ हो तो उस भाव का फल

मिश्च होता है ।

४०--भावेश यदि पापग्रह हो तो उससे युक्त या दृष्ट भाव जब वे नीच में या

अस्तंगत या शत्रू गृही न हों तो शुम फल देते हैं ।

४१--भावेश या उसके मित्र या शुभ ग्रह से युक्त व दृष्ट भाव हो तो फल की वृद्धि

होती है । ४२--भावेश पापयुक्त या दृष्ट हो या उसके घर में पापग्रह हो या पापदृष्टि हो

तो बुरा फल होता Š 1 उस माव के फल का हवास होता है।