सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 171, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ेंफल का स्थूल विचार : १५५
परन्तु भावेश बुरा होने पर उत्पन्न सच्चे फल की प्राप्ति म॑ अडचन होतो है । इससे
पहिले भावेश से फल का विचार करना ।
५९--भावेश ओर भाव बलरहित हो और उस भाव का कारक पापग्रह के बीच में
हो या पापयुक्त या पापदृष्ट हो या शत्रुग्रह युक्त या दृष्ट हो तो उस भाव का फल नाश
'हो जाता है, दूसरे प्रकार से नहीं ।
६००-कोई भाव जहाँ लग्नेश हो उस भाव को उन्नति होती है ।
६१--भावेश लग्न से केन्द्र त्रिकोण या लाभ में हो या किसी भाव से उस भाव का
भावेश १-५-९-११ स्थान में हो तो उस भाव की वृद्धि होती है ।
६२--भावेश उच्चादि वर्ग में प्राप्त होकर बलवान् हो तो उस भाव की पुष्टि
होती है ।
३--छग्न आदि प्रत्येक भाव से विचार करना कि उस भाव से त्रिकोण या
४-७-१० घर मे शुभग्रह या उसका स्वामी हो और वहाँ पापग्रह का योग या दृष्टि न हो
तो उस भाव का सब फल शुभ होता है या भाव पुष्ट होता ë । यदि ऐसा न हो तो उनउन भावों का नाश समझना । मिश्रग्रह युक्त हो तो मिश्रफल होता ë ।
६४--किसी भावेश के साथ नवमेश हो तो लाभजनक है ।
६५--कोई भावेश शुभग्रह हो और छरन से तीसरे घर में हो तो साधारण फल
देता है ।
६६--कोई भावेश जहाँ हो उस भाव का स्वामी दुष्टस्थान में हो तो मूलभाव को
निर्बल करता Š । यदि वह उच्च, मित्रराशि या स्वराष्षि में हो तो उस भाव की पुष्टि
करता है ।
६७--जिस भाव से ११, २, ३, स्थान में गत उस भावेश के मित्र या उसके
उच्चस्थान के स्वामी हों और वे ग्रह अस्त, शत्रुगृही या नीच गत न हों तो उस भावको
पुष्ट और बलवान् करते हैं 1
६८--जो भावेश अपने अंश के बराबर होकर जिस भाव में हो उप्त भाव का पूर्ण
फल देता है ! भाव से अल्प या अधिक ग्रह का अंश हो तो अनुपात से उसके फल का
अनुमान करना । -
६९--भावेश से ग्रहों के पापस्य और शुभत्व में अन्तर इस प्रकार पड़ जाता है—
(अ) केन्द्रेश-पाप ग्रह हो = शुभ फल देता ë
शुभ ग्रह हो = अशुभ फल देता हैं
(ब) त्रिकोणेश--चाहे पाप या शुभ ग्रह हो = सदा शुभ ।
(म) केन्द्र में उत्तरोत्तर १-४७-१० भाव क्रम से वली होते हैँ । अर्थात्
लग्नेश और चतुर्थेश पापग्रह हों तो लग्नेश की अपेक्षा चतुथंश शुभ फल
देने में अधिक समर्थं होगा और दशमेश पाप ग्रह हो तो सबसे उत्तम
फल देगा । इसी प्रकार लग्नेश और चतुर्थेश शुभग्रह होतो लग्न की