सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 187, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ेंफल 'का स्थूल विचार : १७१
११--राहु-कैतु ४, ६ ८ १२ घर को छोड़कर द्विस्वभाव पर अर्थात् ३-९ घर में
हों तो लाभदायक होते हैं ।
१२--राहु के साथ जो ग्रह हो उसका अच्छा या बुरा गुण राहु ग्रहण कर लेता है।
परन्तु राहु के साथ रहनेवाला शुभग्रह भी अपनी दशा अन्तदेशा में बुरा फल देता है ।
१३--दशम में राहु हो तो अपनी दशा में तीर्थ कराता है ।
१४ - राहु, केतु सां बुध २-१२ घर के स्वामी होकर दिस्वभाव के होते हैं । वे
जिस ग्रह के साथ रहते हैं वैसे ही हो जाते हैं अर्थात् गुरु, शुक्र चन्द्र के साथ शुभ और
मंगल शनि के साथ अशुभ फल देते हैं ।
१५--राहु-केतु जब कहो अकेले हों तो राहु की अन्तिम दशा निषिद्ध होती है,
प्रथम दशा शुभ होतो है । केतु की प्रारम्भिक दशा निकृष्ट और अन्तिम दशा उत्तम
होती है। `
१६--राहु-केतु में से कोई ४-१० घर में हो और त्रिकोण के स्वामी से सम्बन्ध हो
तो शुभफल होता है।
१७--राहु-केतु के भीतर केन्द्र स्वामी या त्रिकोणेश का अन्तर होने पर शुभफळ
होता है । :
१८--राहु-केतु त्रिकोण में हों और किसी केन्द्रेश से सम्बन्ध हो तो अच्छा है।
१९--राजयोग हो तो राहु-केतु की महादशा में तथा राजयोग कारक प्रह की
अन्तर्दशा में या उस ग्रह की अन्तर्दशा में जिसके घर में राहु, केतु हों उसका फळ होता
है। परन्तु राहु-केतु १-४-१० या ५-९ घर में हों।
अन्य ग्रह
१--सुयं-चंद्र स्वगृही या च्च में हों तो राजा सरोखा ऐश्वर्य देते ë
२---सूर्य-चंद्र मकर आदि ६ राशियों में बलयुक्त हों तो पूरा फल देते हैँ 1
३--सूय से सप्तम में जो ग्रह हों पूर्ण फल देते हैँ ।
ग्रह अपने दीप्तांश के भीतर फल देते हैं दीप्तांश के बाहर पहुँच जाने पर फ में
अन्तर पड़ जाता है । अर्थात् शुभ प्रह की योगदृष्टि में इतने अंश के भीतर शुभ ë!
पापग्रह की योग दृष्टि में इतने अंश के भीतर अशुभ है । अंशो से अधिक अन्तर पड़
जाने पर शुभता या अशुभता घट जाती ë!
ग्रह सूर्य चन्द्र मंगल बुघ गुरु शुक्र शनि
दीप्तांश १५ १२ ८ ७ q ७ ९
५--पापग्रह ३-६-११ घर में अच्छा फल देते हैं, १-८-१२ भाव में अनिष्ट
करते हैं ।
६--क्षीण चन्द्र १-६-८-१२ में अशुभ है 1
७--सौम्यग्रह सब स्थानों में साघारणतः अच्छा कळ देते हैं । |
८--जिस राशि में चन्द्र हो वह राशि या उसका स्वामी बली हो और चन्द्र मी