सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 194, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ें१७८ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
दृष्य चक्न--सप्तम भाव के अंशादि के आगे ८-९-१०-११ भाव और लग्न के
मुक्तांश तक है। š
अदृश्य चक्र--लग्न के आगे भोग्य अंश से सप्तम के मुक्तांश तक 1
फल विचारने के लिए ये सामग्री चाहिये--
( १ ) जन्म का शुद्ध स्थानिक समय ( इष्ट) और जन्म स्थान ।
( २) जन्म का अयन, गोल, सम्वत, मास, पक्ष, तिथि, वार, नक्षत्र, योग,
करण आदि ।
( ३ ) जन्म नक्षत्र का भोग्यभुवत, और भभोग ।
( ४) ग्रह स्पष्ट । ( ५ ) भाव स्पष्ट । ( ६ ) लग्न कुण्डली और भाव कुण्डलो ।
(७) पंचघा मैत्री चक्र । ( ८ ) ग्रह के दशवगं या द्वादशधर्ग आदि के चक्र ।
(९) सब ग्रहों के अष्टक वगं चक्र एवं सर्वाष्टक वर्ग चक्र आदि ।
(१०) ग्रह और भाव का बल चक्र ।
(११) ग्रह और भाव दृष्टि का चक्र ।
(१२) ग्रह रश्मि चक्र ।
(१३) गणित द्वारा स्पष्ट की हुई अंशायु, पिंडायु, निसर्गायु, अष्टक वर्ग की
भिन्नायु, दशाविभाग, आयु, समुदाय आयु चक्र ।
(१४) इष्ट कष्ट आदि के चक्र ।
(१५) दशा, अंतर्दशा, प्रत्यंतरदशा आदि के चक्र गोर उनका समय सम्वत्, मास
आदि ।
(१६) जन्म के समय ग्रहण उल्कापात आदि अशुभ योग तो नहीं थे ।
फल विचारने के लिए क्या-क्या देखना पड़ता है
भाव फल जानने को प्रत्येक ग्रहों का विचार कर उनको पूरी स्थिति का एक चक्र
बना लेना चाहिये जिससे प्रगट हो कि उस ग्रह में शुभता और अशुभता कितनी-कितनी
है। इसके लिए यह देखना कि---
१--प्रह का शुम, अशुभ, मिश्र, उदय, अस्त, वक्रो, मार्गी, शीघ्रगामी या मंदगामी
होना ।
२- क्षेत्र, वह किस ग्रह के घर में है। उसका स्वामी, उसका मित्र, शत्रु, सम,
अधिमिन्न, अघिलत्रु के बिचार से किस प्रकार से उसकी मैत्री है ।
३--अधिकार-प्रहों का उच्च नीच, मूलत्रिकोण, स्वस्थान आदि के विचार से
उसका अधिकार कैसा है ।
४-- स्थान-केन्द्र त्रिकोण पणफर त्रिक त्रिषडाय आदि स्थान के विचार से उस ग्रह
को कैसी स्थिति है और उसके साथ कोई ग्रह है क्या ?
५--मैत्री---सम्बन्धित ग्रहों से नेसगिक एवं पंचघा मैत्री से शत्रु, मित्र, अधिमित्र,
अधिशत्रु, सम आदि के विचार से Sar सम्बन्ध है ।