सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंफल का स्थूल विचार : १७९
का की परस्पर है. या किसी ग्रह या भाव प्र किस-किस प्रकार की
७--अवस्था और चेष्टा-(भ) ग्रह की दीप्तादि अवस्था कैसी है 1
(ब) ग्रह की बाल तरुण आदि आयु किस प्रकार की ë 1
(स) ग्रह की प्रवास मृत्यु आदि कैसी चेष्टा है 1
८--वर्ग-होरा, द्रेष्काण, नवांश, दवादशाँश आदि कुण्डलियों में ग्रहों की उपरोक्त
बताई बातों पर विचार करना अर्थात्--
(भ) ग्रहृ का शुभाशुभत्व, अस्त, उदय, वक्री, मार्गी, क्षेत्र, स्थान, अधिकार, मंत्री, दृष्टि आदि का विचार करना ।
(ब) वर्ग में वह शुभ वगं है या अशुभ का । वर्गोत्तम या षड़वर्ग शुद्धि है या नहीं ?
(स) पारिजात आदि वर्ग में वह किस प्रकार का है । bk
९--अष्टक वर्ग चक्र के अनुसार उस प्रह को स्थिति कैसी है । उसे कितनी शुभ
रेखा किस-किस राशि में प्राप्त हुई है ओर सर्वाष्टक चक्र में किस भाव में कितनी शुभ
रेखा मिली हैं इत्यादि ।
१०--बल--ग्रह या भाव पूर्णबली, मध्यवली, हीनबली या निबंली है इसको
विचार करना । š ४
११--रदिम-प्रह की रश्मि क्या है? १ |
१२ --गुण-घमं-प्रह और भाव में जो राशि है उनका क्या-क्या गुण-धर्म है 1 स्वभाव घातु सम विषम स्त्री पुरुष आदि जो पृथक-पृथक् प्रत्येक के गुण-धर्म बताये Q उनके
अनुसार परिस्थिति वश गुण-घर्म ग्रह और राशि का भी पृथक् विचार करना ।
१३--भाव-जिस विषय का विचार करना ë वह किस भाव से विचारणीय है या
उस भाव से क्या-क्या बातें विचार की जाती हूँ ।
१४--भावेश-भाव का स्वामी किस भाव में और किस राशि में है ओर उसके
साथ कोई ग्रह है कया ? Y
१५--भावकारक-उस भाव का या विशेष विचारणीय बात का कारक ग्रह कया है?
१६--भावस्थ ग्रह-उस भाव में ग्रह है या बिना ग्रह के है और भावस्पष्ट ओर ग्रहस्पष्ट के विचार से उस भाव के प्रारम्भ, मध्य या अन्त में हैं या भाव सन्धि में है 1
१७---सम्बन्ध से होनेवाले योग-इन ग्रहों का परस्पर या किसी भाव या स्थान या
राशि से कोई सम्बन्ध है या नहीं । सम्बन्ध अच्छा है या बुरा । इस प्रकार ग्रहों के स्थान,
राशि, भाव, वर्ग आदि के द्वारा सम्बन्ध विचारने से ग्रहों के १८००० योग बनते हैं ।
जिनमें से बहुत से योग पृथक आगे बताये गये हैं ।
१८--दक्षा-प्रहों का फल उनकी दशा अन्तर्दशा में होता हे । इससे ग्रहों की महा-
दशा, अन्तर्दशा, प्रत्यन्तदंशा आदि से उनका समय सूचक सम्वत् मास आदि भी जान
लेना चाहिये जिससे प्रगट हो कि अमुक. qg को दशा या अन्तदंशा अमुक सयय में आयगी
तब उस ग्रहका फल होगा ।