भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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१८० : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

इन प्रत्येक बातों से ग्रह और भाव की स्थिति को तौल कर उसके अच्छे या बुरे फल

का विचार करना पड़ता ë ।

उपरोक्त बातों का ज्ञान होने पर निम्नलिखित फलों का विचार करना

१--जन्म समय का अयन, गोल, सम्वत्‌, मास, पक्ष, दिन, नक्षत्र योग, करण,

लग्न, चंद्र आदि के विचार से फल ।

२---प्रत्येक ग्रह का प्रत्येक भाव के अनुसार फल ।

३--प्रत्येक भाव की राशि के अनुसार फल ।

४--प्रत्येक भाव के स्वामी का स्थान एवं मैत्री आदि सम्बन्ध से फल ।

५_प्रत्येक ग्रह का मिन्न-मिन्न भाव पर भावस्थ ग्रहों पर दृष्टि का फल ।

६--किसी भाव में एक से अधिक ग्रह रहने का फल ।

७--भाव के कारकग्रह से फल का विचार ।

८--मारकग्रह और मारकेशग्रह का विचार ।

९--कुण्डली में कोई विशेष योग अरिष्टयोग, राजयोग, दरिद्रयोग, राजदण्डयोग,

अंग-भंगयोग, अल्पायु दीर्घायु आदि योग) घनयोग, सन्तानयोग आदि अनेकों योगो का

विचार कर फल का निर्णय करना । .

१०--आयु के योगों के अनुसार या गणित द्वारा आयुर्दाय का निर्णय करना ।

१ १--वगे कुण्डलियो द्वारा विशेष फल का विचार, वर्गोत्तम आदि होने का फल

ओर पारिजात आदि वर्ग का फळ ।

१२--अष्टवर्गं द्वारा फल विचार । :

१३--जन्मकुण्डलीसे गोचर ग्रहों का विचार कर फल जानना ।

: १४-अत्येक भाव की भिन्न-भिन्न बातों का विचार करते हुए सम्पूर्ण भावों पर

बिचार ।

१५--प्रहों के उच्च-नीच स्वगृही मूलत्रिकोण मित्रगृही शत्रुगृही आदि होने पर फल

का विचार।

१६--ग्रहों की अवस्था, आयु और चेष्टा एवं बल के अनुसार फल का विचार ।

१७--पहों के केन्द्र त्रिकोण पणफर त्रिक आदि स्थानों में रहने का फल या इन

स्थानो के स्वामी होने का फल ।

१८--गंडांत आदि का फल का विचार ।

१९--काछांग विचार ।

२०--अप्रकाश आदि ग्रहों के विचार से फल ।

२१--अन्त में ग्रहों के फल का समय जानने की दद्या, अन्तर्दशा, प्रत्यन्तदैशा आदि के समय पर होने वाले फल का विचार । इन सब बातों पर विचार करते हुए सब प्रकार से फलों का मिश्रण कर उनको बुद्धि से तोल कर फल का अनुमान करना । ग्रहों का अच्छा और बुरा फल भी बताया