सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंफल का स्थूल विचार : १८१
है । अच्छी परिस्थिति में यह ग्रह अच्छा फल देगा. बुरी परिस्थिति में बुरा फछ देगा
इसपर घ्यान रहे ।
इन सबका फल का विचार आगे दिया ë ।
सारांश में भावफल विचारने में इन बातों पर ध्यान देने की आवश्यकता है--
१-विचारणीय भाव में कितनी शुभता या अशुभता है । उस भाव का सम्बन्ध
विचारने से जितनी शुभता होगी उतना शुभफल होगा नहों तो उसका फल कष्टदायक
होगा ।
२--भावेश या उसका कारकग्रह उस भाव में है या किस क्षेत्र में है, उसका मित्र
गृही आदि क्षेत्र, उच्च आदि अधिकार और बल क्या है वक्रो अस्त आदि तो नहीं है।
उस भाव का भावेश वहाँ न हो तो क्या उसकी दृष्टि वहाँ है और किस-किस भाव या
ग्रह से उसका सम्बन्ध है ।
३--उस भाव में कौन ग्रह हैँ, उस ग्रह का अधिकार क्षेत्र बल मादि कैसा है, भावेश
से उसकी मैत्री कैसी है । यह ग्रह शुभ पाप या मिश्र कैसा है नीच अस्त इन्र क्षेत्री आदि
तो नहीं है । वह शुभ स्थान में है या अशुभ, उसका भावेश शुभ है या पापग्रह । वह
ग्रह किस-किस भाव पर दृष्टि डालता है ओर उस ग्रह का सम्बन्ध कहाँ-कहाँ है । जिस
ग्रह से सम्बन्ध हो वह अच्छी दशा में है या बुरी दशा में ।
४--भावेश केन्द्र त्रिकोण आदि में है क्या ? त्रिकोणेद केन्द्रेश आदि भो है क्या ?
"या निक त्रिषडाय आदि स्थान में है । अर्थात् वह शुभ घर में है या अशुभ घर में ?
५--भावस्थ ग्रह या भावेश वर्ग में स्वनवांश, उच्चनवांश या वर्गोत्तम है ? पारि-
जातक आदि.वग में उसका क्या अधिकार है ।
६--भावेश पर किन-किन ग्रहों की दृष्टि है और उसका सम्बन्ध कहाँ-कहाँ है। `
७--उस भाव पर किन-किन ग्रहों की दृष्टि है और भाव बल क्या हैं |
८--फिर भिन्न-भिन्न ग्रहों के सम्बन्ध का विचार कर विशेष योगों की खोज करना
जो उन ग्रहों की स्थिति के अनुसार बनते हें ।
दशा के फल का. स्थुल विचार
१--विद्योत्तरी महादशा आदि के स्वामी का शुभ या अशुभ प्रभाव केवल उसकी
दशा.म ही नहीं होता, दूसरे ग्रह की अंतर्दशा में भी उसका फल होता है ।
२--महादक्षा में ग्रह अंतर्दशा वाळे ग्रह का प्रभाव ग्रहण कर लेता है अर्थात्
अंतर्दशा वाले ग्रह का प्रभाव मुख्य होता है और महादशा वाले ग्रह का शुभाशुभ प्रभाव
दब जाता है । ç
३--सब भाव के विचार से शुभ ग्रह अपनी दशा में अपने शुभफल को अच्छी प्रकार
से प्रगट करेगा जैसे लग्न का सम्बन्धी शुभग्रह लगन से सम्बन्ध रखनेवाले अच्छे फ
आरोग्यता आदि को देगा । धनभाव में शुभग्रह का सम्बन्ध होने पर घन वस्त्र आदि
प्राप्त होंगे । सहज माव से शुभ सम्बन्ध होने पर भाई बहिन की सन्तुष्टि होगी इत्यादि