भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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फल का स्थूल विंचार : १७७

बा है, उसमें सामथ्यं कैसे बढ़ता और घटता है इन सब बातों पर विचारना

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( १० ) ग्रह में सामर्थ्यं इस प्रकार जानना कि ग्रह का अधिकार व जिसके स्थान

में हो उसकी योग्यता प्रमाण से स्थान बल पाकर उसमें सामर्थ्य आता है ।

( ११ ) एक ग्रह दुसरे का मित्र हो तो कोई भो कार्य करने का बल आ जाता है ।

ग्रह परस्पर शत्रू हों तो उसमें कार्य नाश करने की ताकत आ जाती है और सम होने पर

परिस्थिति के अनुसार कभी अच्छा कभी बुरा हो जाता ë ।

( १२ ) भाव बल देखते समय यह अवश्य देखना कि उसका स्वामी किस भाव में

बैठा है | भाव और ग्रहों के सम्बन्ध पर भी विचार करना ।

( १३ ) भावफल और भावेशफल बल अनुसार विचारना । जैसे--लग्नराशि और

लग्नेश भी बलवान्‌ हो तो शरीर पुष्ट होगा ।

यदि एक बलवान्‌ और दूसरा अल्प बली हो तो सामान्य फल ।

यदि एक बलवान्‌ और दूसरा हीनबल हो तो थोड़ा फ़ल ।

दोनों निर्बल हों तो शरीर पुष्ट न होगा ।

इसी प्रकार सब भाव का फल विचारना ।

( १४) ग्रह उच्च या मित्र स्थानी हो षड्वल भी प्राप्त हो तो भी यदि वह सन्धि

में हो तो अशक्त हो जाता है । ऐसा ग्रह कोई फल नहीं देगा । कोई ग्रह जब उस भाव में

ठीक अंश में बराबर हो तो उस भाव का पूर्ण फल देगा । इसके बीच में कितना फल देगा

यह अनुपात से जान लेना चाहिए ।

भाव के आरम्भ के ग्रह को जितना फर देने को सामर्थ्यं होती है उसका फल वृद्धि

होने से जब ग्रह भाव के मध्य में आता है तो पूर्ण फल देने की सामर्थ्यं होती है और

उसके आगे जैसा जैसा बढ्ता है बल क्षीण होता जाता है अन्त में असमर्थ हो जाता है ।

इस कारण भाव और ग्रहस्पष्ट से मिलान कर देखना चाहिए कि ग्रह भाव की आरम्भ

सन्धि, बीच या विराम सन्धि में कहाँ है ।

( १६ ) लग्न के अनुसार ग्रह भाव नहीं तो सम्पूर्ण फल नहों देता फल में विरोध

हो और ग्रह समान हो तो जिसका बल अधिक हो उसका फल कहना ।

( १७) आरम्म सन्धि से भाव मध्य तक ग्रह आरोही कहलाता है उसके भागे

विराम सन्धि ग्रह = अवरोही ।

(१८) चन्द्र राशि के जो फल कहे गये हैं ये लग्न राशि के भी हैं ओर पृष्टि भी

लग्त कुंडली सरीखी चन्द्र कुण्डली से भी विचारना।

( १९) लग्न कुंडलो से जो फल विचारना बताया है वैसा चन्द्र कुंडली से भी

विचार करे । द र

( २० ) जितने फल कहे हैं दृश्य चक्र में प्रत्यक्ष रूप से फर देते हैं । अदृष्य चक्र म

परोक्ष ख्प से फल देते ë ।

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