भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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१९६ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

(३) आघान या प्रश्न लग्न में चन्द्रमा जिस दादशांशक में है उस राशि के चन्द्रमा

में आगे जन्म होगा । ' १

इसमें भी किसी आचायं का भत ë कि चन्द्रमा जितने द्वादशांशक पर है मेषादि

गणना से उतने ही संख्यक राशि के चन्द्रमा में जन्म होए या जिस राशि पर चन्द्र है

उसी से गिनकर जितने द्वादशांशक पर चन्द्रमा है उतने ही राशि के चन्द्रमा में जन्म होगा 1

किसी का मत है लग्न और चन्द्रमा में से जो विशेष बलवान्‌ हो उसके तत्काल

द्वादशांश में जो राशि है उसके चन्द्रमा में जन्म होगा ।

नक्षत्र भुक्तिन्नक्षत्र मुक्ति निकालने का यह अनुपात है--

/ १ राशि को १८०० कला होती हुँ कितनी कला द्वादशांश की भोगी हैं कितनी बाकी

Ë इसका त्रैराशिक करके नक्षत्र-मुक्ति निकालता जिससे इष्ट काल मालूम कर कुण्डली बना लेना ।

यहाँ ४ प्रकार से जन्म समय का ज्ञान कहा है, इनमें से २-३ प्रकार से जहाँ ऐवपता

आवे उसे ग्रहण करना ।

मान लो आघान लग्न कुण्डली का ग्रह स्पष्ट किया तो चन्द्र १ रा ९९-१९-२६” वृष

का आया इसका द्वादशांश निकाला । Q द्वादशांश २९-३० का होता है । वृष में सिह

का द्वादशांश आया और यह चोथा द्वादशांश हुआ क्योंकि ९-११” में द्वादशांश

( २-३० x ४ )-७९-.३० पुरे घट गये ९0-११-२६ में ६०९१-२०” घटाया तोः

१०-४१"-२६" यह चोथे द्वादशांश का बचा ।

चन्द्र वृष ९-११-२६ . १ राशि की १८०० में एक द्वादशाँश

द्वादशाग ७-२३० १५० का है तो शेष कितने का होगा ?

शेष १-४१-२६ १२

=१°--४१'-२६"८१०१-२६५ (१०१-२६) x १५% _

यह चौथे दवादशांश की कला हुई । MD न

१ (१०१-२६" ५१२)

=१२१७'-१२'

१२१७-१२ में अब देखना है सिंई द्वादशांश के कौन-कौन नक्षत्र मुक्त हुए हैं

१ नक्षत्र १३९-२००८००? का होता है १ चर्‌ण=२००' का है ।

शेष १२१७-१२" १ चरण २९०! का ९5१५ घटो में

१ नक्षत्र ८०" मघा पुरा घट गया । भुक्त तो शेष १७-१२" कितने समय में। शेष ४१७-१२ ३

२ चरण-४००-०पूर्वा फा० रचरण घटे | (१७-१२) > १५ घटी _ (१७-१२) २ ३ शेष = १७-१२ = पूर्वा फा० का Z$? कक... तोसरा चरण । Yer a त _५१-३६

४०

=t wo १७ पल