भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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पृष्ठ 213

'निषेक अध्याय : १९७

सिंह राशि में मघा, पूर्वा फा० पुरे और उ० फा० का १ चरण, मिलकर होता है

यहाँ मघा गत होकर पूर्वा फाल्गुनी के तीसरे चरण में १ घ० १७ पछ भुक्ति परः पंचम

सें समय मिलने पर जन्म होगा ।

आधान लग्न से जन्मपद ज्ञान या जन्म समय से आधान समय जानना

जन्ममास + ४ इस प्रकार अंक जोड़ने से गभं

„ तिथि+३ मास आदि निकल आता है 1 यदि लग्न

„ नक्षत्र+१० में संदेह हो तब इस प्रकार विचारना ।

„ S+"

„ वार+ ३

आधान-लग्न से पंचम या नवम लग्न में जन्म होता है ।

प्रसव मास

ऊपर ९ या १० मास में जन्म होना बताया है । सो प्रश्‍न समय में गर्भ कितने

आस का है उसक्ते जानने के लिए कई युक्त्या हैँ उनमें से एक यह भी है।

१-लग्न से, या लग्न से, जिस स्थान में शुक्र हो उससे गर्भ का मिलान मिळता

छो उतने महीने का गर्भ जानना, उससे ९-१० मास गिन लेना ।

३--दूसरा प्रकार आधान काल में लग्न चर राशि होवे तो दशम मास में, स्थिर

हो तो व्यारहवें मास में, द्विस्वभाव हो तो बारहवें मास में प्रसव जानो ।

आधान लग्न ज्ञान न होने से प्रश्‍न लग्न, प्रश्‍न नवांश में जो बलवान्‌ हो उससे

कहना ।

साधारण प्रसव नवम या दशम मास में ही होता है अधिक समय-समय के. योग हैं

उनसे जानना ।

दिन या रात में जन्म होगा

तत्काल लग्न में वर्तमान नवांशक दिवाबली हो तो दिन में, रात्रि बली हो तो रात्रि

3 जन्म होगा ।

उदाहरण--लग्न में नवांशक वृष यह रात्रिवली है तो रात्रि में जन्म होगा । लग्न

स्पष्ट ४ रा ५९-५९९-१४" है सिंह राशि में ५०-५९-१४” देखा तो दूसरा वृष का

नवांश आया 1

लग्न सिंह ५०-५९१-१४" १ नवांश २००” रात्रिमान पूरे २९-६

एक गत नवांश __ ३-२० घडी में तो दोष १५९९-१४ कितने में ?

शेष २-३९-१४ (१५९-१४) > (२९-६)

१५९'- १४” ०० =

९ wo ç që ४६३३-२७-२४ रात्रिमात २९ घ० (४६१३-२७-२४) र ॥ २३-१० घ. प

रात्रि इष्ट