भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

पृष्ठ 214, कुल 418 में से

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१९८ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फित खण्ड

यदि दिवाबली अंश हो तो दिन का जन्म जानो । तब दिनमान का गुणा करना ।

२०० का भाग देना तो दिन का इष्ट निकलेगा ।

३ वर्ष में प्रसूति योग-- निषेक लग्न में मकर या कुम्भ के नवांश का उदय हो और

उसके सप्तम घर में शनि हो तो गभं ३ वर्ष में .प्रसव हो ।

१२ वर्ष में प्रसव--यदि निषेक लग्न में ककं राशि का नवांश हो और चन्द्रमा

सप्तम हो तो वह गर्भ १२ वषं में निमुक्त हो ।

संभोग में मनोवृत्ति--आघान या प्रश्न लग्न के सप्तम में जैसी राशि हो उसके

अनुरूप पुरुष या स्त्री की प्रकृति होती है । सप्तम में पापदृष्टि योग हो. तो कलह युक्त

या सरोष या बलात्कार हो । यदि सप्तम में शुभग्रह या योगदृष्टि हो तो प्रेम व हास

भोर विलासपूर्वक मैथुन हुआ !

संभोग प्रकार--सप्तम में जो राशि हो उसके समान संभोग कहना जैसे सप्तम में

मेष हो तो बकरे के सदृश, वृष बेल के तुल्य, इत्यादि ।

चारों केन्द्र में पापग्रह हो तो पशु के समान संभोग ।

यदि ३ केन्द्र में भी ग्रह हो तो पशु के समान संभोग ।

संभोगकर्ता कोन था जिससे गर्भ रहा--उस पुरुष के चन्द्र, को गुरु न देखता हो;

सूयं देखता हो तो स्त्री का संमोगकर्ता कोई ओहदेदार या'साहुकार हो

मंगल देखे तो--संभोगकर्ता सिपाही आदि ।

शुक्र देखे तो--संभोगकर्ता उत्तम जाति का सुन्दर ।

हानि देखे तो--संभोगकर्ता शूद्र नौकर से गर्भ सम्भव ।

इन ४ में से कोई न देखे तो गभं सम्भव नहो है ।

पुत्र होगा या कन्या

लात १) करता यदि हो गर्भ लग्न का नवांश पुरुष पुरुष राशि राशि हो हो याा वहाँ वहाँ पुरुष पुरुष ग्रह हो तो पुत्र होगा, गा.

(३) यदि गर्माघान के समय को लग्न:से ५,,७, या ९ वें घर पर शुभ ग्रह या पुरुष ग्रह

की दृष्टि हो तो पुत्र होगा । पुरुष ग्रह सूर्य और मंगल हैं ।

(३) स्त्रियों को ऋतु १६ रात्रि तक रहती. है इसमें प्रथम को ७ रात्रि छोड़ कर संभोग

करने से विषम में कन्या, सम में पुत्र पैदा हो । :

(४) बली सूर्य, गुरु आघात काल में विषम राशि विषमांश में हो तो पुत्र होगा, बली

चन्द्र शुक्र या मंगल सम राशि या संगांशको में हो तो कन्या हो 1

(५) सूर्य चन्द्र या गुर विषम राशि या विषम नवांश में होकर बली हो लग्न को छोड़ कर

शनि और कोई स्थान में हो विषम राशि में हो तो पुत्र होगा सम राशि या सम

नवांश में हो तो कन्या होगी ।

(६) शनि या राहु पुरुष राशि में हो या सुर्य गुरु बलवान्‌ होकर पुरुष राशि में हो या

ह होकर दशम या एकादश भाव में हो तो पुत्र होगा अन्यथा कन्या

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